सही तरीके से ब्रीदिंग लेना सीखें: बेली ब्रीदिंग से तनाव कम, शरीर में बढ़ेगी एनर्जी

निवेदिता चंद|02 मई 2026
बेली ब्रीदिंग से तनाव कम, शरीर में बढ़ेगी एनर्जी

हम दिनभर में हजारों बार सांस लेते हैं। यह एक ऑटोमैटिक प्रोसेस है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम सही तरीके से सांस ले रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, करीब 90 प्रतिशत लोग गलत तरीके से सांस लेते हैं। ज्यादातर लोग सिर्फ छाती तक सांस भरते हैं। इससे शरीर को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिलती। यही कारण है कि आजकल थकान, तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में बेली ब्रीदिंग यानी गहरी सांस लेने की तकनीक एक आसान और असरदार समाधान बनकर सामने आई है। यह तकनीक शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

बेली ब्रीदिंग एक डीप ब्रीदिंग तकनीक है। इसमें सांस लेते समय पेट बाहर की ओर फैलता है और सांस छोड़ते समय अंदर की ओर सिकुड़ता है। यह सांस फेफड़ों के निचले हिस्से तक जाती है। इससे शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है। सामान्य सांस लेने में हम फेफड़ों का पूरा उपयोग नहीं कर पाते। लेकिन इस तकनीक से फेफड़े पूरी तरह एक्टिव हो जाते हैं। यही वजह है कि इसे योग और प्राणायाम में खास महत्व दिया गया है।

योग और प्राणायाम में महत्व

भारतीय परंपरा में सांस को जीवन का आधार माना गया है। योग और प्राणायाम में सही सांस लेने की तकनीक पर खास जोर दिया जाता है। बेली ब्रीदिंग इन्हीं प्राचीन विधियों का हिस्सा है। यह तकनीक न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि मानसिक शांति भी देती है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति का फोकस बढ़ता है। स्ट्रेस लेवल कम होता है।

कैसे करें बेली ब्रीदिंग?

इस तकनीक को करना बेहद आसान है। आप इसे घर पर ही कर सकते हैं। सबसे पहले किसी शांत जगह पर बैठें या लेट जाएं। शरीर को रिलैक्स रखें। एक हाथ अपने पेट पर रखें। अब धीरे-धीरे नाक से सांस लें। ध्यान रखें कि सांस लेते समय आपका पेट बाहर की ओर आए। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस दौरान पेट अंदर की ओर जाए। शुरुआत में पांच से दस मिनट तक अभ्यास करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है।

क्या हैं इसके फायदे?

बेली ब्रीदिंग के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। यह तनाव और एंग्जायटी को कम करता है। दिमाग को शांत करता है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से एनर्जी लेवल बेहतर होता है। ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। इससे दिल की सेहत पर भी अच्छा असर पड़ता है। इसके अलावा यह नींद की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। जिन लोगों को नींद की समस्या होती है, उनके लिए यह तकनीक काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

लोग क्या गलतियां करते हैं?

सांस लेते समय कई लोग आम गलतियां करते हैं। सबसे बड़ी गलती है सिर्फ छाती से सांस लेना। इसके अलावा बहुत तेज या उथली सांस लेना भी सही नहीं है। कई लोग नियमित अभ्यास नहीं करते। इससे उन्हें पूरा फायदा नहीं मिल पाता। सही तकनीक और नियमितता दोनों जरूरी हैं।

कब और कितनी बार करें अभ्यास?

बेली ब्रीदिंग का अभ्यास दिन में दो से तीन बार किया जा सकता है। सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे दिनभर ताजगी बनी रहती है। रात में सोने से पहले करने से नींद बेहतर आती है। इसे आप मेडिटेशन या योग के साथ भी जोड़ सकते हैं।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।