क्या हीटवेव से प्रभावित होते हैं पीरियड्स?: डिहाइड्रेशन से बिगड़ता हार्मोनल बैलेंस, तेज गर्मी से शरीर पर पड़ता है असर

निवेदिता चंद|30 अप्रैल 2026
डिहाइड्रेशन से बिगड़ता हार्मोनल बैलेंस,  तेज गर्मी से शरीर पर पड़ता है असर

गर्मी का मौसम हर किसी के लिए चुनौती लेकर आता है। खासकर जब हीटवेव जैसी स्थिति बनती है, तो शरीर पर इसका असर और ज्यादा गहरा होता है। महिलाओं के लिए यह असर कई बार सामान्य से ज्यादा गंभीर हो सकता है। लगातार बढ़ता तापमान, लू और उमस शरीर के अंदर कई तरह के बदलाव पैदा करते हैं। इसका सीधा असर हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। यही वजह है कि कई महिलाओं को इस दौरान पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं महसूस होने लगती हैं। यह बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे शरीर की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

हीटवेव का सबसे बड़ा असर शरीर में पानी की कमी के रूप में सामने आता है। जब शरीर लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहता है, तो उसे अपने तापमान को संतुलित रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान पसीने के जरिए पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। यही डिहाइड्रेशन हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करता है। इसका असर मासिक धर्म चक्र पर पड़ता है। कई बार पीरियड्स देरी से आते हैं या अनियमित हो जाते हैं।

दिमाग के नियंत्रण केंद्र पर भी असर

हीटवेव का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता। यह दिमाग के उस हिस्से को भी प्रभावित करता है, जिसे हाइपोथैलेमस कहा जाता है। यही हिस्सा शरीर के तापमान और हार्मोन को कंट्रोल करता है। जब यह प्रभावित होता है, तो हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है। इसका असर सीधे पीरियड्स पर पड़ता है। कुछ महिलाओं को पीरियड्स जल्दी आते हैं, तो कुछ को देरी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा फ्लो ज्यादा या कम हो सकता है। मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है।

तनाव बढ़ने से बढ़ती समस्याएं

तेज गर्मी शरीर में स्ट्रेस लेवल को भी बढ़ा देती है। इस दौरान शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन ज्यादा बनने लगता है। यह हार्मोन शरीर के दूसरे जरूरी हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के संतुलन को बिगाड़ देता है। इसका सीधा असर मासिक धर्म पर पड़ता है। पीरियड्स के दौरान दर्द बढ़ सकता है। थकान और कमजोरी ज्यादा महसूस हो सकती है। कई बार महिलाएं खुद को असहज और कमजोर महसूस करती हैं।

नींद और डाइट पर भी पड़ता है असर

गर्मी के मौसम में नींद पूरी न होना एक आम समस्या है। रात में गर्मी के कारण अच्छी नींद नहीं आती। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। साथ ही भूख में भी बदलाव देखने को मिलता है। कई बार लोग सही मात्रा में खाना नहीं खा पाते। इससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। यह स्थिति हार्मोनल हेल्थ को और बिगाड़ देती है। इसका असर पीरियड्स की नियमितता पर पड़ता है। साथ ही इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो सकता है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

महिलाओं को क्यों रहना चाहिए सतर्क

हीटवेव के दौरान महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। शरीर में पानी की कमी न होने दें। नियमित रूप से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें। हल्का और संतुलित भोजन करें। पर्याप्त नींद लें और ज्यादा धूप में निकलने से बचें। अगर पीरियड्स में ज्यादा बदलाव या परेशानी महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर ध्यान देने से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

छोटी सावधानी से बड़ी राहत संभव

गर्मी के इस मौसम में थोड़ी सी जागरूकता बहुत काम आ सकती है। हीटवेव का असर शरीर पर जरूर पड़ता है, लेकिन सही देखभाल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। महिलाएं अगर अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें, तो पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए सतर्क रहें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।

नव्य जागरण

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