कम नींद बन सकती है बड़ी बीमारी की वजह: बच्चों से बुजुर्गों तक हर उम्र के लिए अलग है स्लीप टाइम, उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाती है लोगों की नींद

आज की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग सबसे ज्यादा समझौता अपनी नींद से कर रहे हैं। देर रात तक मोबाइल चलाना, लगातार काम करना, तनाव, सोशल मीडिया और अनियमित दिनचर्या ने लोगों की स्लीप साइकिल पूरी तरह बिगाड़ दी है। कई लोग चार से पांच घंटे की नींद को ही पर्याप्त मान लेते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार कम नींद लेना शरीर को अंदर से कमजोर कर सकता है। इसका असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हार्ट, दिमाग, इम्यून सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य तक पहुंचता है।
डॉक्टरों के मुताबिक अच्छी नींद शरीर की नैचुरल रिपेयर प्रोसेस है। जब हम सोते हैं, तब शरीर खुद को रिकवर करता है। दिमाग मेमोरी को व्यवस्थित करता है। हार्मोन बैलेंस होते हैं। शरीर की कोशिकाएं रिपेयर होती हैं। यही वजह है कि पर्याप्त और नियमित नींद को हेल्दी लाइफ का सबसे मजबूत आधार माना जाता है। हर उम्र के लोगों को अलग-अलग समय की नींद की जरूरत होती है। बच्चों को सबसे ज्यादा और वयस्कों को संतुलित नींद की जरूरत होती है।
नवजात बच्चों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है नींद
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म से तीन महीने तक के नवजात शिशुओं को 14 से 17 घंटे तक नींद लेनी चाहिए। इस उम्र में बच्चों का शरीर और दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है। नींद के दौरान ही उनका ब्रेन डेवलपमेंट मजबूत होता है। अगर छोटे बच्चों की नींद पूरी नहीं होती तो उनके व्यवहार और विकास पर असर पड़ सकता है। चार से ग्यारह महीने तक के शिशुओं को 12 से 15 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। इस दौरान उनका इम्यून सिस्टम विकसित होता है। अच्छी नींद लेने वाले बच्चों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा कम होता है।
छोटे बच्चों और स्कूली स्टूडेंट्स के लिए क्यों जरूरी है स्लीप
एक से दो साल तक के बच्चों को 11 से 14 घंटे की नींद चाहिए। यही समय होता है जब बच्चे चलना, बोलना और नई चीजें सीखना शुरू करते हैं। तीन से पांच साल तक के प्री-स्कूल बच्चों को 10 से 13 घंटे तक सोना चाहिए। इससे उनकी सीखने की क्षमता और मानसिक विकास बेहतर होता है। स्कूल जाने वाले छह से 13 साल तक के बच्चों को नौ से 11 घंटे की नींद जरूरी बताई गई है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे कम सोते हैं तो उनका फोकस कमजोर होने लगता है। पढ़ाई में मन नहीं लगता। चिड़चिड़ापन बढ़ता है और याददाश्त भी प्रभावित होती है।
किशोरों और युवाओं में सबसे ज्यादा बिगड़ रही स्लीप साइकिल
आज सबसे ज्यादा खराब स्लीप पैटर्न किशोरों और युवाओं में देखा जा रहा है। 14 से 17 साल के किशोरों को आठ से 10 घंटे तक नींद लेनी चाहिए। इस उम्र में शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत नींद खराब कर रही है। 18 से 64 साल तक के वयस्कों के लिए सात से नौ घंटे की नींद सबसे बेहतर मानी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि नींद की कमी से काम करने की क्षमता और निर्णय लेने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।
बुजुर्गों के लिए भी जरूरी है नियमित नींद
65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को सात से आठ घंटे की नींद जरूरी बताई गई है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ लोगों की नींद हल्की हो जाती है और बार-बार टूटती है। इसके बावजूद पर्याप्त आराम लेना बेहद जरूरी है। अच्छी नींद बुजुर्गों की मानसिक सक्रियता और शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।
कम नींद के खतरे को समझना जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार कम नींद लेना शरीर के लिए धीरे-धीरे जहर जैसा काम करता है। इससे तनाव बढ़ता है। इम्यूनिटी कमजोर होती है। हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं। कई लोगों में एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या भी बढ़ने लगती है।











