मधुमालती एक बेल, अनेक फायदे: खूबसूरती के साथ सेहत का भी खजाना, एशिया में पाई जाने वाली खास बेल

निवेदिता चंद|06 मई 2026
खूबसूरती के साथ सेहत का भी खजाना, एशिया में पाई जाने वाली खास बेल

घर की सुंदरता बढ़ाने वाली मधुमालती अब सिर्फ सजावटी पौधा नहीं रह गई है। आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों को खास महत्व दिया गया है। यह बेल न सिर्फ वातावरण को आकर्षक बनाती है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी फायदेमंद मानी जाती है। इसके फूल, पत्तियां और जड़ तीनों उपयोगी होते हैं। त्वचा रोग, बुखार और घाव भरने जैसे मामलों में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। इस वजह से यह पौधा आजकल फिर से चर्चा में है।

मधुमालती मुख्य रूप से एशियाई देशों में पाई जाती है। भारत, फिलीपींस और मलेशिया में यह आसानी से देखी जा सकती है। अंग्रेजी में इसे “रंगून क्रीपर” या “चायनीज हनीसकल” कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम कॉम्ब्रेटम इंडिकम है। अलग-अलग भाषाओं में इसके अलग नाम हैं। इसकी सबसे खास बात इसके फूलों का रंग बदलना है। पहले दिन सफेद, दूसरे दिन गुलाबी और तीसरे दिन गहरा लाल हो जाता है। यह बदलाव परागण के लिए कीटों को आकर्षित करता है।

हर मौसम में खिलने वाली खूबसूरती

यह बेल गर्मियों में भी फूलों से भरी रहती है। जब अन्य पौधे सूखे दिखते हैं, तब भी यह खिली रहती है। इसे बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है। रोजाना कम से कम पांच घंटे धूप जरूरी है। ज्यादा कटिंग इसे पसंद नहीं होती, लेकिन हल्की छंटाई से इसकी ग्रोथ बेहतर होती है। यह पौधा 15 से 40 डिग्री तापमान में अच्छी तरह पनपता है। ठंड में इसकी पत्तियां गिर सकती हैं, लेकिन पौधा जीवित रहता है।

घर में लगाने के फायदे

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मधुमालती घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। वास्तु दोष कम करने में भी इसे उपयोगी माना जाता है। खासकर दक्षिणमुखी मकान में इसे लगाने की सलाह दी जाती है। इसे बालकनी, छत या गार्डन में आसानी से उगाया जा सकता है। बड़े गमले में लगाने से यह तेजी से फैलती है और घर की शोभा बढ़ाती है।

लगाने और देखभाल का आसान तरीका

इस पौधे को कटिंग से आसानी से उगाया जा सकता है। बसंत और बरसात का मौसम इसके लिए सबसे अच्छा होता है। नर्सरी से भी तैयार पौधा लाया जा सकता है। गर्मियों में रोज एक दो बार पानी देना चाहिए। सर्दियों में पानी की जरूरत कम होती है। महीने में एक बार जैविक खाद डालने से इसकी ग्रोथ बेहतर होती है। केले या प्याज के छिलके का उपयोग भी फायदेमंद होता है। अच्छी बात यह है कि यह पौधा कम बीमार होता है और कीटों का असर भी कम पड़ता है।

औषधीय गुणों से भरपूर

आयुर्वेद में मधुमालती को कई रोगों में उपयोगी बताया गया है। इसके फूल और पत्तियों का काढ़ा सर्दी-जुकाम में राहत देता है। डायबिटीज में इसके पत्तों का रस लाभकारी माना जाता है। बुखार के बाद शरीर दर्द में इसकी पत्तियों का उबला पानी आराम देता है। पेट की सूजन और गैस में भी यह मदद करता है। इसके फल का काढ़ा दांत दर्द में उपयोगी होता है। किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

सावधानी भी जरूरी

हालांकि यह पौधा फायदेमंद है, लेकिन बिना डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के इसका ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति की शरीर प्रकृति अलग होती है। इसलिए सही मात्रा और सही तरीका जानना जरूरी है।

नव्य जागरण

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