नींद पूरी, फिर भी शरीर अकड़ा?: गलत स्लीपिंग पोजीशन होने से होती है समस्या, 50% पीठ के बल सोए

अगर आप सुबह उठते ही शरीर में दर्द और अकड़न महसूस करते हैं, तो सिर्फ नींद की कमी को दोष देना सही नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी बड़ी वजह आपकी स्लीपिंग पोजीशन हो सकती है। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर ऑफिस जॉब करने वाले युवाओं में यह आम हो गई है। सुबह उठते ही शरीर भारी लगता है। मांसपेशियां जकड़ी हुई महसूस होती हैं। कई बार ऐसा लगता है जैसे शरीर ने ठीक से आराम ही नहीं किया।
यह समस्या हर किसी को हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। जिन लोगों को पहले से आर्थराइटिस या फाइब्रोमायल्जिया जैसी समस्या है, उन्हें ज्यादा परेशानी होती है। इसके अलावा जिन लोगों में विटामिन डी या आयरन की कमी होती है, उनमें भी अकड़न ज्यादा रहती है। जो लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं और एक्सरसाइज नहीं करते, उनमें यह समस्या आम है।
गलत पोजीशन से बिगड़ता बॉडी एलाइनमेंट
सोते समय शरीर की गलत मुद्रा पूरे बॉडी एलाइनमेंट को बिगाड़ देती है। अगर आप लंबे समय तक एक ही करवट में सोते रहते हैं, तो रक्त संचार प्रभावित होता है। मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे सुबह उठते ही शरीर अकड़ा हुआ लगता है। गर्दन, कंधे, कमर और पैरों में दर्द शुरू हो जाता है। कई बार हाथों में झनझनाहट भी महसूस होती है।
सही स्लीपिंग पोजीशन कैसी हो
एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने का तरीका सुधारना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि नींद का लगभग 50% समय पीठ के बल सोएं। जरूरत हो तो घुटनों के नीचे तकिया रखें। इससे रीढ़ सीधी रहती है। बाकी 25% समय दाईं करवट और 25% समय बाईं करवट सो सकते हैं। इससे शरीर पर दबाव बराबर बंटता है। एक ही पोजीशन में लंबे समय तक न रहें।

पेट के बल सोना क्यों खतरनाक
कई लोग पेट के बल सोना पसंद करते हैं। इससे कुछ मामलों में एसिडिटी कम महसूस होती है। लेकिन यह पोजीशन रीढ़ के लिए सही नहीं है। पेट के बल सोने से कमर और गर्दन पर दबाव बढ़ता है। इससे लंबे समय में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए इस आदत को धीरे-धीरे बदलना जरूरी है।

बाईं करवट सोना क्यों फायदेमंद
बाईं करवट सोना कई मामलों में फायदेमंद माना जाता है। इससे पाचन बेहतर होता है। दिल पर दबाव कम पड़ता है। एसिडिटी की समस्या भी कम हो सकती है। हालांकि हर व्यक्ति की सुविधा अलग होती है, इसलिए अपने शरीर के अनुसार पोजीशन चुनना जरूरी है।
वैज्ञानिक कारण भी समझें
नींद की हर साइकिल लगभग 90 मिनट का होता है। रातभर में शरीर कई बार अपनी स्थिति बदलता है। अगर आप गलत पोजीशन में ज्यादा देर तक रहते हैं, तो शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इसलिए सही पोजीशन और सही तकिये का इस्तेमाल जरूरी है।
तकिया और सपोर्ट भी जरूरी
सिर्फ पोजीशन ही नहीं, तकिया भी अहम रोल निभाता है। पीठ के बल सोने वालों को पतला तकिया लेना चाहिए। वहीं करवट लेकर सोने वालों को थोड़ा मोटा तकिया इस्तेमाल करना चाहिए। इससे गर्दन और रीढ़ सही स्थिति में रहती है। घुटनों के नीचे तकिया रखने से भी शरीर का बैलेंस बना रहता है। इससे मांसपेशियों पर दबाव कम होता है।
डॉक्टर की सलाह
ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट्स के अनुसार गलत पोजीशन में सोने से नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है। रात में बार-बार नींद टूटती है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। तनाव बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि सोते समय अपनी मुद्रा पर ध्यान दें। पूरी रात पोजीशन कंट्रोल करना आसान नहीं है, लेकिन जब भी नींद खुले, एक बार अपनी स्थिति जरूर जांच लें। छोटी-छोटी आदतें बदलकर आप सुबह की अकड़न से राहत पा सकते हैं।
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