गर्मियों का सुपरफूड है शहतूत: लू से बचाने में रामबाण, खून की कमी दूर करने से लेकर आंखों की रोशनी बढ़ाने तक है फायदेमंद

निवेदिता चंद|16 अप्रैल 2026
लू से बचाने में रामबाण, खून की कमी दूर करने से लेकर आंखों की रोशनी बढ़ाने तक है फायदेमंद

गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में छोटे-छोटे, रसीले और खट्टे-मीठे शहतूत नजर आने लगते हैं। आयुर्वेद में शहतूत को केवल एक फल नहीं, बल्कि एक औषधि माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो इसे चिलचिलाती धूप और लू से बचाव के लिए उपयुक्त फल बनाती है। भारत में इसे 'शहतूत' और अंग्रेजी में 'मुलबेरी' के नाम से जाना जाता है।

शहतूत में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। जिन लोगों को कब्ज, एसिडिटी या भूख न लगने की समस्या होती है, उनके लिए शहतूत का सेवन बेहद लाभकारी है। यह आंतों की सफाई करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।

लू और डिहाइड्रेशन से करेगा बचाव

गर्मियों में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। शहतूत में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। दोपहर के समय मुट्ठी भर शहतूत खाने से आप लू के थपेड़ों से बच सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इसका शरबत पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है।

आंखों और त्वचा के लिए फायदेमंद

शहतूत विटामिन 'ए' और विटामिन 'सी' का बेहतरीन स्रोत है। विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है, वहीं विटामिन सी त्वचा में चमक लाता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करते हैं और चेहरे की झुर्रियों से बचाते हैं। इसे खाने से खून साफ होता है, जिससे मुंहासों की समस्या भी दूर होती है।

इम्यूनिटी बढ़ाए और खून की कमी दूर करे

शहतूत में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है। साथ ही, इसमें मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।

मथुरा, गोरखपुर जैसे जिलों में खूब मिलेगा

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में शहतूत की खेती और इसके पेड़ बहुतायत में मिलते हैं। खासतौर पर मेरठ, सहारनपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे जिलों में इसके पेड़ काफी संख्या में देखे जा सकते हैं। गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी बाग-बगीचों और सड़कों के किनारे शहतूत के पुराने पेड़ आज भी मौजूद हैं। गोरखपुर के रामगढ़ ताल क्षेत्र और चिड़ियाघर (शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान) के आसपास के इलाकों में भी इसके पेड़ खूब मिलते हैं। यहां के लोग न केवल इसे फल के रूप में चाव से खाते हैं, बल्कि रेशम कीट पालन के लिए भी इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है।

शहतूत को हमेशा धोकर ही खाना चाहिए

हालांकि शहतूत बेहद फायदेमंद है, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि इसे हमेशा धोकर ही खाना चाहिए क्योंकि इसके छोटे छिद्रों में धूल-मिट्टी जमा हो सकती है। साथ ही, बहुत अधिक मात्रा में खट्टे शहतूत खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गले में खराश हो सकती है। शुगर के मरीजों को इसका सेवन सीमित मात्रा में और एक्सपर्ट्स की पर ही करना चाहिए।

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