25 अप्रैल को मनाया जाता है वर्ल्ड मलेरिया डे: वर्ष 2,000 में हुई थी शुरुआत, समय पर पहचाने इसके लक्षण

निवेदिता चंद|24 अप्रैल 2026
वर्ष 2,000 में हुई थी शुरुआत,  समय पर पहचाने इसके लक्षण

अप्रैल का महीना आते ही स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कई अहम दिन मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है वर्ल्ड मलेरिया डे। यह दिन पूरी दुनिया में 25 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मकसद साफ है। लोगों को मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी के प्रति जागरूक करना। साथ ही इसके बचाव और इलाज की सही जानकारी देना। मलेरिया आज भी कई देशों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं। सही समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

वर्ल्ड मलेरिया डे हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत पहले अफ्रीकी देशों से हुई थी। साल 2,000 में इसे “अफ्रीका मलेरिया डे” के रूप में मनाया गया। इसका उद्देश्य था मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में जागरूकता फैलाना। बाद में इस पहल को वैश्विक स्तर मिला। साल 2008 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे आधिकारिक रूप से “वर्ल्ड मलेरिया डे” घोषित किया। तब से यह दिन पूरी दुनिया में मनाया जाता है। हर साल अलग-अलग थीम के जरिए लोगों को नई जानकारी दी जाती है।

वर्ल्ड मलेरिया डे का महत्व

मलेरिया एक मच्छर जनित बीमारी है। यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह बीमारी शरीर को तेजी से कमजोर करती है। समय पर इलाज न मिले तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। यह दिन लोगों को सतर्क करता है। उन्हें बताता है कि छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं। सरकारें, हेल्थ एजेंसियां और एनजीओ मिलकर कैंपेन चलाते हैं। जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। गांव से लेकर शहर तक लोगों को जानकारी दी जाती है। इससे बीमारी को रोकने में मदद मिलती है।

क्या है इस साल की थीम

हर साल एक खास थीम तय की जाती है। इस साल की थीम है- ड्रिवन टू इंड मलेरिया: नाउ इट्स कैन, नाउ वी मस्ट। इसका सीधा मतलब है कि अब मलेरिया को खत्म करना संभव है। लेकिन इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। सिर्फ योजना नहीं, एक्शन जरूरी है। यह थीम लोगों और सरकारों दोनों को जिम्मेदारी का संदेश देती है।

मलेरिया के लक्षण

मलेरिया के लक्षण शुरुआत में सामान्य लग सकते हैं। लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। तेज बुखार आता है। ठंड लगती है। शरीर में कंपकंपी होती है। सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है। कई बार उल्टी भी होती है। अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। देरी करना जोखिम भरा हो सकता है। जल्दी इलाज शुरू हो जाए तो बीमारी कंट्रोल में आ जाती है। इससे जान बचाई जा सकती है।

मलेरिया से बचाव के आसान तरीके

मलेरिया से बचना मुश्किल नहीं है। बस थोड़ी सावधानी जरूरी है। सबसे पहले मच्छरों से बचाव करें। रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। यह सबसे सरल और असरदार तरीका है। घर के आसपास सफाई रखें। कहीं भी पानी जमा न होने दें। गड्ढों, कूलर और टंकियों में जमा पानी मच्छरों का घर बनता है। समय-समय पर इन्हें साफ करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। जरूरत हो तो मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें। अगर क्षेत्र में खतरा ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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