पटाखों पर पूरे देश में नहीं लगेगा बैन: SC तय करेगा नियम और समय, 15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

दीपावली से पहले पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने संकेत दिया कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, धार्मिक भावनाओं के साथ लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंता के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश ने कहा कि पटाखे चौबीसों घंटे जलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट अब पटाखे जलाने के लिए समय-सीमा और इस्तेमाल किए जा सकने वाले पटाखों की श्रेणी पर विचार करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को बेरियम की जांच और पटाखों के डेसिबल स्तर से जुड़े मानकों पर काम करने का समय दिया है। इसके साथ ही संयुक्त फायर टेस्ट कराने की प्रक्रिया भी पूरी की जानी है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
एएसजी ने मांगा 15 अक्टूबर तक का समय
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि बेरियम आधारित पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी बाकी है। उन्होंने इसे पूरा करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कुछ शर्तों के साथ जॉइंट पटाखों के निर्माण की अनुमति दी जा सकती है।
लड़ी जैसे होते हैं जॉइंट पटाखे
कोर्ट ने जॉइंट पटाखों के बारे में जानकारी मांगी तो भाटी ने बताया कि ये लड़ी जैसे होते हैं। ऐसे पटाखों पर पहले भी प्रतिबंध लगाया गया था। जॉइंट पटाखे या लड़ी में कई छोटे पटाखों को धागे या तार के जरिए एक साथ जोड़ा जाता है। इससे पटाखों की लंबी माला तैयार होती है, जिसे आम बोलचाल में लड़ी, पटाखों की माला या चटाई पटाखा कहा जाता है।










