गोंडा में मगरमच्छ हमले के शिकार मजदूर की मौत: 34 दिन अस्पताल में लड़ी जिंदगी की जंग, इलाज में लापरवाही पर उठे सवाल

उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र में मगरमच्छ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर भानु की बुधवार सुबह लखनऊ में उपचार के दौरान मौत हो गई। करीब 34 दिनों तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह करीब 10 बजे शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और समय पर आर्थिक सहायता न मिलने का आरोप लगाया है।
यह घटना 24 जून को सनौली मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत के निश्चित पुरवा में हुई थी। भानु तटबंध के किनारे काम कर रहे थे, तभी एक मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके बाएं पैर का काफी मांस निकल गया था और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था। हादसे के बाद उन्हें पहले गोंडा के एक निजी अस्पताल, फिर जिला अस्पताल और बाद में बेहतर इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
भानु के परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका आरोप है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिलने से इंफेक्शन बढ़ता गया और उनका दाहिना पैर लगातार सड़ता रहा, जो अंततः मौत का कारण बना। इलाज का खर्च उठाने के लिए परिवार ने रिश्तेदारों और ग्रामीणों से कर्ज तक लिया, लेकिन किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली।
प्रशासन ने आर्थिक मदद का दिया भरोसा
उमरी बेगमगंज थाना प्रभारी पवन मिश्रा ने बताया कि 24 जून को मगरमच्छ के हमले में घायल भानु का लगातार उपचार चल रहा था और बुधवार सुबह लखनऊ में उनकी मौत हो गई। वहीं गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि मामले की समीक्षा की जा रही है। नियमों के अनुरूप जो भी आर्थिक सहायता संभव होगी, वह परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल भानु की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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