अलकनंदा हॉस्टल विवाद; छात्रों ने किया जोरदार प्रदर्शन: DDU का मेन गेट बना आंदोलन का रणक्षेत्र, दो दिन बाद यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

गोरखपुर|13 मई 2026
DDU का मेन गेट बना आंदोलन का रणक्षेत्र, दो दिन बाद यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अलकनंदा गर्ल्स हॉस्टल का मामला अब विस्फोटक रूप ले चुका है। खाने में कीड़े निकलने के आरोपों ने पूरे कैंपस का माहौल गर्म कर दिया है। बीते दो दिनों से ​शिकायत कर रहे छात्र बुधवार को सड़क पर उतर आए। वे यूनिवर्सिटी के मेन गेट के सामने सड़क किनारे धरने पर बैठ गए। इस दौरान यूनिवर्सिटी का माहौल घंटों तनावपूर्ण बना रहा। यूनिवर्सिटी प्रशासन के ​खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्राें ने घटना की निष्पक्ष जांच और दो​षियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। छात्रों के विरोध को देखते हुए पुलिस भी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आई। मेन गेट से लेकर एडी बि​ल्डिंग तक बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। उधर, बवाल बढ़ता देख यूनिवर्सिटी प्रशासन ने घटना के दो दिन बाद मंगलवार की शाम सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण जारी किया। डीडीयू की सोशल मीडिया सेल की ओर से जारी स्पष्टीकरण में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम से ही इंकार कर दिया। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने भोजन की गुणवत्ता ठीक पाई और घटना की पु​​ष्टि नहीं हुई। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने प्रशासन ने वायरल व्हाट्सएप चैट के बारे में कोई बयान नहीं जारी किया। सोशल मीडिया पर वायरल चैट के स्क्रीन शॉट में कई बार वार्डन मीतू सिंह का भी जिक्र है, यहां तक कि उन्होंने खुद खाने की जांच के लिए हॉस्टल की छात्राओं से पूछा है। हालांकि, इस वायरल वीडियो और चैट के स्क्रीन शॉट की पु​ष्टि नव्य जागरण नहीं करता है।

वहीं, बुधवार की सुबह कैंपस के बाहर भारी भीड़ जमा रही। अंदर से लेकर मुख्य सड़क तक छात्रों की कतार लग गई। छात्र संगठनों ने इसे सिर्फ हॉस्टल का मामला मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लापरवाही, दमन और छात्रों की समस्याओं को दबाने के आरोप लगाए। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ खाने में कीड़े मिलने का मुद्दा नहीं है। यह पूरे यूनिवर्सिटी की बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन चुका है।

DDU का मेन गेट बना आंदोलन का रणक्षेत्र, दो दिन बाद यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

जेपी आंदोलन की तरह उठेगी आवाज, छात्रनेताओं की खुली चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान छात्रनेताओं ने मंच से बेहद उग्र भाषण दिए। नारों और हुंकारों से पूरा परिसर गूंज गया। छात्रनेताओं ने कहा कि इस देश का इतिहास छात्र आंदोलनों से भरा पड़ा है। जब-जब छात्रों ने आवाज उठाई, तब-तब सत्ता और व्यवस्था को झुकना पड़ा। आंदोलनकारी नेताओं ने जेपी मूवमेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र शक्ति कभी कमजोर नहीं होती। उन्होंने कहा कि अलकनंदा हॉस्टल की मेस दुर्व्यवस्था अब बड़ा आंदोलन बनेगी। छात्रनेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें पुलिसिया दबाव से डराने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश का जवाब दोगुनी ताकत से दिया जाएगा। चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने छात्रों की बात नहीं सुनी, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होगा।

यूनिवर्सिटी को बनाया जा रहा कंक्रीट का जंगल

आंदोलनकारी छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर पर्यावरण की अनदेखी के भी आरोप लगाए। छात्रनेताओं ने कहा कि यूनिवर्सिटी कैंपस का स्वरुप तेजी से बदल रहा है। लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। हरियाली खत्म की जा रही है। पूरे कैंपस को कंक्रीट में बदला जा रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन विकास के नाम पर कैंपस की पहचान मिटा रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ छात्रावासों में खाने की गुणवत्ता बदहाल है। दूसरी तरफ प्रशासन केवल इमारतों और निर्माण कार्यों में व्यस्त है। छात्रों ने कहा कि हॉस्टल की समस्याएं लंबे समय से उठाई जा रही हैं, लेकिन हर बार शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

लाठी-डंडों से डरने वाले नहीं, पुलिस को सीधी चुनौती

प्रदर्शन के दौरान कई छात्रनेताओं ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। खुले तौर पर पुलिस प्रशासन को चुनौती दी गई। छात्रनेताओं ने कहा कि यूनिवर्सिटी का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। यहां कई आंदोलनों ने जन्म लिया है। कई प्रशासनिक अधिकारी आए और चले गए, लेकिन छात्र आंदोलन हमेशा कायम रहा। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस बल प्रयोग करेगी, तो अगले दिन दोगुनी संख्या में छात्र सड़क पर उतरेंगे। छात्रों को डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई यूनिवर्सिटी के हक और अधिकारों की है। छात्र इसे हर हाल में जारी रखेंगे। प्रदर्शन के दौरान तराजू तौल के देखो पलड़ा किसका भारी है, तुम्हें झंकार प्यारी है, हमें ललकार प्यारी है जैसे नारे गूंजते रहे।

DDU का मेन गेट बना आंदोलन का रणक्षेत्र, दो दिन बाद यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

पुलिस तैनात, लेकिन छात्र पीछे नहीं हटे

बढ़ते तनाव को देखते हुए यूनिवर्सिटी गेट पर पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिसकर्मी लगातार हालात पर नजर बनाए रहे। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र पीछे हटने के मूड में नहीं दिखे। कई छात्र जमीन पर बैठकर नारे लगाते रहे। कुछ छात्रनेता प्रशासन के खिलाफ भाषण देते रहे। उधर गर्म माहौल को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम को पैनी नजर से देखता रहा। यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों और पुलिस के बीच भी इसे लेकर बातचीत होती रही। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र प्रशासन से सीधे बातचीत की मांग पर अड़े रहे।

दो दिन के बवाल के बाद यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

लगातार दो दिनों तक बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद आखिरकार यूनिवर्सिटी प्रशासन सामने आया। बुधवार शाम यूनिवर्सिटी की सोशल मीडिया सेल की ओर से फेसबुक और व्हाट्सएप चैनल पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया। प्रशासन ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में खाने में कीड़े मिलने की घटना से इनकार किया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हॉस्टल के भोजन को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कीड़े निकलने की घटना को निराधार बताया है।

अब कैंपस में आर-पार की लड़ाई के संकेत

अलकनंदा हॉस्टल विवाद अब केवल मेस तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला छात्र राजनीति, प्रशासनिक कार्यशैली और कैंपस की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जिस तरह से छात्र संगठन खुलकर मैदान में उतर आए हैं, उससे आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होने की आशंका बढ़ गई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन फिलहाल घटना के अ​स्तित्व से ही इंकार कर रहा है। दूसरी तरफ छात्र संगठन आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी में दिख रहे हैं। कैंपस का माहौल पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच टकराव किस दिशा में जाता है।

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