Crimeगोरखपुर में फर्जी वीडियो वायरल करने वाले तीन यूट्यूबर्स पर FIR: फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के संचालक को ब्लैकमेल कर मांग रहे थे रंगदारी, पहले भी कर चुके हैं वसूली

गोरखपुर|14 मई 2026
फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के संचालक को ब्लैकमेल कर मांग रहे थे रंगदारी, पहले भी कर चुके हैं वसूली

शहर में सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो वायरल कर ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आया है। नौका विहार स्थित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के संचालक तोषित गोयल ने रामगढ़ताल थाने में तीन यूट्यूबर्स के खिलाफ अवैध वसूली का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस को दी तहरीर में तोषित ने बताया, वे लेकवर्ष प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के CEO हैं। यह कंपनी रामगढ़ताल में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बार का संचालन करती है। तोषित ने बताया कि कंपनी के पास रेस्टोरेंट और बार संचालन के लिए सभी वैध सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं। फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के संचालन में सभी विधिक नियमों का पालन किया जाता है लेकिन बीते कुछ समय से यूट्यूबर प्रतीक तिवारी, अनुराग मिश्रा और सुनील तिवारी एक साजिश के तहत अपने सोशल मीडिया अकांउट से फर्जी वीडियो वायरल कर रहे हैं। इससे पहले भी तीनों ब्लैकमेल कर हजारों रुपयों की वसूली कर चुके हैं। तोषित ने बताया कि आरोपी यूट्यूबर्स पिछले कुछ समय से दोबारा लाखों रुपये देने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि पैसे न देने पर रेस्टोरेंट की छवि खराब करने के लिए तीनों अपने सोशल मीडिया अकाउंट से फेक वीडियो वायरल कर रहे हैं। आरोपी अपने यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए लगातार लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। मामले में रामगढ़ताल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सभी लाइसेंस और दस्तावेज वैध

रेस्टोरेंट संचालक तोषित गोयल ने पुलिस को दिए एप्लीकेशन में बताया, फ्लोट 24*7 रेस्टोरेंट और बार का संचालन उनकी देख-रेख में होता है। उन्होंने कहा, प्रतिष्ठान कानूनी प्रावधानों के दायरे में रहकर संचालित किया जाता है। सभी जरुरी लाइसेंस और सरकारी अनुमति ली गई है। इसके बावजूद कुछ यूट्यूबर्स अवैध वसूली की साजिश रचकर उन्हें निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। इससे कारोबार की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

धनउगाही की साजिश रचकर वायरल किया वीडियो

तोषित गोयल के मुताबिक यूट्यूबर्स प्रतीक तिवारी, अनुराग मिश्रा और सुनील तिवारी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो अपलोड किया। धनउगाही की साजिश के तहत वीडियो को ताजा घटना बताकर वायरल किया गया। कई फर्जी वीडियो भी अपलोड कर वायरल किए गए। सोशल मीडिया पर लगातार नकारात्मक कंटेंट डाला गया। इससे ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही थी। तोषित ने बताया कि यह पूरा कारनामा सुनियोजित था। इसका मकसद सिर्फ दबाव बनाना और धन उगाही करना था। वायरल वीडियो के जरिए प्रतिष्ठान को विवादित दिखाने की कोशिश की गई। इससे व्यापार और कर्मचारियों दोनों पर असर पड़ा।

कुछ और यूट्यूबर्स आ सकते हैं जद में

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है। SP सिटी दशरथ निमिष पाटील ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है। सबूत के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सोशल मीडिया के जानकारों की मानें तो ब्लैकमेलिंग के मामले में कुछ अन्य यूट्यूबर्स पर भी कार्रवाई हो सकती है। फर्जी वीडियो को आरोपियों के कुछ जानकारों ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। एक कथित नेता ने तो बाकायदा वीडियो अपलोड कर दबाव बनाने का प्रयास किया। अब जांच में पुलिस ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई कर सकती है।

पहले भी विवादों में रहे हैं प्रतीक और अनुराग

फर्जी वीडियो वायरल करने के आरोपी प्रतीक तिवारी और अनुराग मिश्रा के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं दर्ज हुआ है। इससे पहले DDU के पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह और तत्कालीन कुलसचिव प्रो. अजय सिंह के साथ मारपीट के आरोप में अनुराग मिश्रा के खिलाफ कैंट पुलिस ने साल 2023 में केस दर्ज किया था। हालांकि, बाद में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को वापस ले लिया था। वहीं, प्रतीक तिवारी ने कुलपति कार्यालय में प्रदर्शन के दौरान वर्तमान कुलपति और अन्य अधिकारियों से अभद्रता की थी, उसके खिलाफ भी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराया था। इससे, पहले उसपर यूनिवर्सिटी गेट का जबरन ताला तोड़ने का आरोप भी लग चुका है।

रुपये मांगकर दी बदनाम करने की धमकी

पीड़ित ने आरोप लगाया कि वीडियो पोस्ट करने वाले लोग लगातार संपर्क कर रहे थे। उनसे मोटी रकम की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। तोषित ने कहा कि यह सीधी ब्लैकमेलिंग का मामला है। आरोपियों ने पहले भी उनसे रुपये वसूले थे। अब दोबारा लाखों रुपये की डिमांड की जा रही थी। दबाव बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया। रेस्टोरेंट की ऑनलाइन इमेज खराब करने की कोशिश हुई। इससे कारोबार को आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंपे

तोषित गोयल ने बताया कि उनके पास कई डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। बातचीत के रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों का डेटा सुरक्षित रखा गया है। यह सभी साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। सोशल मीडिया का दुरुपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे वैध कारोबार करने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से कड़ी कानूनी कार्रवाई की अपील की है।

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