गोरखपुर पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई: लाइनहाजिर हुए 45 पुलिसकर्मी, लंबित विभागीय जांचों की समीक्षा तेज

मासूम बच्ची से रेप और हत्या की हालिया घटना के बाद गोरखपुर पुलिस महकमे में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे 45 पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर दिया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ पहले से लंबित विभागीय जांचों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में आरोप प्रमाणित होंगे, संबंधित पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार हाल की घटना ने पूरे विभाग को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया है। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि गंभीर आरोपों वाले सभी मामलों की विभागीय जांच प्राथमिकता के आधार पर पूरी कराई जाए। सभी संबंधित अधिकारियों से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की गई है। जिन मामलों में जांच की गति धीमी है, उन्हें तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।
कई अन्य पुलिसकर्मी भी जांच के दायरे में
लाइनहाजिर किए गए 45 पुलिसकर्मियों के अलावा कई अन्य कर्मियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और कर्तव्य में लापरवाही से जुड़ी शिकायतों की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ लाइनहाजिर करने से लेकर निलंबन अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से सभी लंबित मामलों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर दोषियों को राहत न मिल सके।
दोष साबित होने पर सेवा रिकॉर्ड भी होगा प्रभावित
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों का उल्लेख उनकी चरित्र पंजिका (सर्विस रिकॉर्ड) में भी दर्ज किया जाएगा। इसका प्रभाव भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर पड़ेगा। गंभीर मामलों में बर्खास्तगी की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की साख बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और किसी भी प्रकार के दुराचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है। हालिया घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कानून लागू कराने वाले कर्मियों पर यदि गंभीर आरोप सिद्ध होते हैं तो उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।











