गोरखपुर के निजी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा: परिजनों ने शव को बाहर रखकर किया प्रदर्शन, डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप

रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित शाही ग्लोबल अस्पताल में अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत को लेकर मंगलवार को परिजनों ने जमकर हंगामा किया। लखनऊ में इलाज के दौरान मौत के बाद शव लेकर लौटे स्वजन अस्पताल पहुंचे और परिसर के बाहर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी थी, लेकिन समय रहते उसकी गंभीर स्थिति को नहीं समझा गया। हंगामे की सूचना पर रामगढ़ताल पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया।
चिलुआताल थाना क्षेत्र के सेमरा मंझरिया निवासी 35 वर्षीय राकेश यादव को अपेंडिक्स की शिकायत थी। स्वजन के अनुसार, उन्हें पांच अगस्त को शाही ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां दूरबीन विधि से अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद सात अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद नौ अगस्त को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच की। अस्पताल के निदेशक डॉ. शिव शंकर शाही के अनुसार, जांच में हार्ट अटैक की जानकारी सामने आई और मरीज की स्थिति को देखते हुए आगे की चिकित्सा के लिए रेफर किया गया।
लखनऊ ले जाते समय बिगड़ी हालत
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, राकेश को हृदय संबंधी गंभीर समस्या थी और उन्हें बाइपास सर्जरी की जरूरत थी। इसी आधार पर उन्हें आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया। स्वजन मरीज को लेकर लखनऊ गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। दूसरी ओर, परिजनों का आरोप है कि राकेश की हालत लगातार बिगड़ रही थी और समय रहते उचित उपचार नहीं मिलने के कारण उनकी जान चली गई। मंगलवार को लखनऊ से शव लेकर लौटने के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
बॉडी सड़क पर रखकर किया प्रदर्शन
मंगलवार सुबह करीब आठ बजे राकेश के गांव के लोग भी अस्पताल पहुंच गए। इसके बाद शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया गया। इससे अस्पताल परिसर और आसपास कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस के पहुंचने के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। परिजनों का कहना था कि यदि मरीज की गंभीर स्थिति को समय रहते पहचानकर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो उसकी जान बच सकती थी।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
अस्पताल के निदेशक डॉ. शिव शंकर शाही ने डॉक्टरों पर लगाए गए लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने बताया कि राकेश का अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया गया था और उन्हें स्वस्थ हालत में सात अगस्त को डिस्चार्ज किया गया था। नौ अगस्त को हार्ट अटैक के बाद उन्हें दोबारा अस्पताल लाया गया। जांच में हृदय संबंधी गंभीर समस्या सामने आने पर बाइपास सर्जरी की आवश्यकता बताई गई और मरीज को रेफर किया गया। उनकी मौत लखनऊ में हुई। अस्पताल प्रबंधन ने हंगामे की सूचना पुलिस को भी दी।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
राकेश भारतीय जनता पार्टी के उतरासोर और सेमरा के बूथ अध्यक्ष थे। उनकी शादी करीब 10 वर्ष पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी है। राकेश मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी मौत के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।










