गोरखनाथ मंदिर में भागवत कथा शुरू: सीएम योगी बोले- सनातनी ज्ञान परंपरा को मिटाना नामुमकिन, 5 हजार वर्षों से जारी है परंपरा

गोरखपुर|
 सीएम योगी बोले- सनातनी ज्ञान परंपरा को मिटाना नामुमकिन, 5 हजार वर्षों से जारी है परंपरा

गोरखनाथ मंदिर में बुधवार को श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। गर्भगृह से अखंड ज्योति और श्रीमद्भागवत महापुराण की शोभायात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसमें शामिल हुए। मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने पूजन-अर्चन किया और महापुराण को दिग्विजयनाथ स्मृति भवन स्थित कथा स्थल की व्यास पीठ पर स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में श्रीमद्भागवत कथा की परंपरा करीब 5000 वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा ज्ञान और भक्ति के साथ निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है और जीवन के उद्देश्य को समझने का मार्ग दिखाती है। योगी ने कहा कि सुखदेव महाराज ने जब राजा परीक्षित को यह कथा सुनाई होगी, तब से अब तक लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान सनातन परंपरा ने उत्थान-पतन और कई परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन ऋषि परंपरा और कथा परंपरा भारतीय स्मृति से कभी समाप्त नहीं हुई।

मनसा-वाचा-कर्मणा में एकरूपता पर जोर

योगी ने कहा कि व्यक्ति के विचार, वाणी और आचरण में साम्यता होनी चाहिए। जब मनसा, वाचा और कर्मणा एक दिशा में चलते हैं तो जीवन में सफलता मिलती है। इसके विपरीत व्यक्ति कुछ बोलता है, सोचता कुछ और है और करता कुछ और है तो भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने इसे जीवन की अज्ञानता का मूल कारण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में सत्य और असत्य के बीच अर्धसत्य भी एक चुनौती बनकर सामने आया है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत जैसी कथा परंपराएं लोगों को सही मार्ग समझने में मदद करती हैं।

डिप्रेशन की चुनौती से जूझ रही है मानवता

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया की मानवता डिप्रेशन की चुनौती से जूझ रही है। विज्ञान ने भले ही काफी प्रगति की हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति कैसे आए, इसका समाधान तलाशने के लिए दुनिया भारत की ओर देखती है। उन्होंने कहा कि भारत की कथा परंपराएं इस मार्ग को और सरल बनाने में योगदान देती हैं। गोरखपीठ में हर वर्ष महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि पर होने वाले आयोजनों की कड़ी में इस बार गोरखपुरवासियों को श्रीमद्भागवत कथा सुनने का अवसर मिल रहा है।

30 सितंबर तक होंगे अलग-अलग कार्यक्रम

सात दिवसीय आयोजन के तहत 24 सितंबर से समसामयिक विषयों पर सम्मेलन शुरू होगा। पहले दिन ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य’ विषय पर चर्चा होगी। 25 सितंबर को ‘नशा नाश का कारण है’ और 26 सितंबर को ‘लोकतंत्र की जननी है भारत’ विषय पर कार्यक्रम होगा। 27 सितंबर को ‘संस्कृत और भारतीय संस्कृति’ तथा 28 सितंबर को ‘भारतीय संस्कृति और गो-सेवा’ विषय पर सम्मेलन आयोजित होगा। 29 सितंबर को युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ और 30 सितंबर को राष्ट्रसंत महंत अवैद्यनाथ की श्रद्धांजलि सभा होगी। 29 और 30 सितंबर को अखंड मानस पाठ और भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।

नव्य जागरण

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