गोरखपुर में पांच घंटे बाद बहाल हुई सिटी बस सेवा: आरएम से वार्ता के बाद कंडक्टरों ने खत्म किया धरना, 11 बजे रवाना हुई पहली बस

मानक से कम वेतन भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार सुबह ठप हुई गोरखपुर सिटी बस सेवा करीब पांच घंटे बाद बहाल हो गई। महेसरा स्थित चार्जिंग प्वाइंट पर बसें खड़ी कर धरने पर बैठे कंडक्टरों ने क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) लव कुमार के साथ वार्ता के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया। सहमति के तहत कंडक्टरों की ओर से तीन प्रतिनिधि चुने गए हैं। मंगलवार तक एसएस ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी मांगों पर समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है।
हड़ताल के कारण सुबह से शहर की सिटी बस सेवा पूरी तरह प्रभावित रही। रोजाना सुबह पांच बजे से संचालित होने वाली बसें नहीं चलने से स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। बाद में वार्ता सफल होने के बाद धरना समाप्त हुआ और सुबह करीब 11 बजे पहली सिटी बस अपने निर्धारित रूट पर रवाना की गई। धरने पर बैठे परिचालकों का कहना है कि पिछली कंपनी का टेंडर समाप्त होने के बाद वेतन भुगतान की जिम्मेदारी नई कंपनी को दी गई है, लेकिन तय मानकों के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि वेतन और अन्य सुविधाओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी के विरोध में सोमवार सुबह सभी परिचालक महेसरा डिपो पहुंचे और बसों का संचालन बंद कर धरने पर बैठ गए।
यात्रियों की दिनचर्या पर पड़ा असर
सिटी बस सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर दैनिक यात्रियों पर पड़ा। महेसरा, मोहद्दीपुर, रेलवे स्टेशन, कचहरी सहित विभिन्न रूटों पर लोग घंटों बसों का इंतजार करते रहे। बसें नहीं मिलने पर अधिकांश यात्रियों को ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन्हें सामान्य दिनों की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ा। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों ने बताया कि अचानक बस सेवा ठप होने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई और कई लोग कार्यालय व कॉलेज देर से पहुंचे।
80 परिचालकों ने रोका संचालन
शहर में वर्तमान में 27 सिटी बसों का संचालन होता है, जिनमें करीब 80 परिचालक तैनात हैं। सभी परिचालकों ने महेसरा चार्जिंग प्वाइंट पर बसें खड़ी कर दी हैं और अपनी मांगों के समर्थन में धरना जारी रखा है। खबर लिखे जाने तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। परिचालकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता और समय पर वेतन भुगतान का भरोसा नहीं मिलता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
ये हैं परिचालकों की प्रमुख मांगें
परिचालकों ने छह रुपये प्रति किलोमीटर की दर से वेतन, बस के चले वास्तविक किलोमीटर के आधार पर भुगतान, जमा डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) की वापसी, प्रत्येक माह तय तिथि पर वेतन, समय से वेतन स्लिप, ईपीएफ, ड्रेस और ज्वाइनिंग लेटर उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा बीच रास्ते में बस खराब होने पर 180 किलोमीटर का मानदेय, स्टाफ की कमी होने पर तत्काल सहयोग तथा छुट्टी के बाद दोबारा ड्यूटी की गारंटी देने की भी मांग उठाई गई है।











