गोरखपुर कैंट-उनौला डबल रेल लाइन तैयार: नॉन-इंटरलॉकिंग की मंजूरी का इंतजार, सावन के बाद संचालन की उम्मीद

गोरखपुर|
नॉन-इंटरलॉकिंग की मंजूरी का इंतजार, सावन के बाद संचालन की उम्मीद

गोरखपुर कैंट से उनौला तक डबल रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) की प्रक्रिया लंबित होने से नई लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। रेलवे ने पहले 16 से 21 जुलाई तक प्री और नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्यक्रम घोषित किया था, जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया। इसके बाद 25 जुलाई से प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव भी तैयार हुआ, लेकिन उसे भी अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी। ऐसे में नई रेल लाइन तैयार होने के बावजूद परिचालन शुरू होने का इंतजार बना हुआ है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन को देखते हुए फिलहाल नॉन-इंटरलॉकिंग कराना संभव नहीं है। माना जा रहा है कि सावन समाप्त होने के बाद ही इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। इसके बाद कैंट-उनौला खंड पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने की संभावना है।

पांच चरणों में हो रहा है दोहरीकरण

गोरखपुर-वाल्मीकिनगर रेलखंड का दोहरीकरण पांच चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में कैंट-पिपराइच, दूसरे में पिपराइच-कप्तानगंज, तीसरे में कप्तानगंज-सिसवा बाजार, चौथे में सिसवा बाजार-पनियहवा और पांचवें चरण में पनियहवा-वाल्मीकिनगर खंड शामिल है। प्रथम चरण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। उनौला-पिपराइच नई डबल लाइन पर नॉन-इंटरलॉकिंग भी पूरी हो चुकी है और वहां ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। वहीं दूसरे चरण में रेल लाइन, पुल और स्टेशन भवनों का निर्माण तेजी से चल रहा है।

1120.66 करोड़ की परियोजना

करीब 95.95 किलोमीटर लंबे गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रेलखंड के दोहरीकरण के लिए रेल मंत्रालय ने 1120.66 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। परियोजना के तहत नौ क्रॉसिंग स्टेशन, तीन हॉल्ट स्टेशन, 10 बड़े और 43 छोटे पुलों का निर्माण किया जाएगा। पनियहवा और वाल्मीकिनगर के बीच नारायणी (गंडक) नदी पर 854 मीटर लंबा महत्वपूर्ण रेलवे पुल भी बनाया जाना प्रस्तावित है।

नव्य जागरण

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