गोरखपुर के नए डीएफओ बने शुभम सिंह: विकास यादव का झांसी ट्रांसफर, चिड़ियाघर निदेशक को मिला अतिरिक्त प्रभार

उत्तर प्रदेश शासन ने वन विभाग में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों के तबादले किए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से जारी आदेश के तहत गोरखपुर वन प्रभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। शासन के इस निर्णय के बाद गोरखपुर वन विभाग को नया नेतृत्व मिला है। वहीं वन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।
शासनादेश के अनुसार गोरखपुर वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव का तबादला झांसी वन प्रभाग में कर दिया गया है। उन्हें झांसी में डीएफओ की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं उनकी जगह शुभम सिंह को गोरखपुर वन प्रभाग का नया डीएफओ नियुक्त किया गया है। शुभम सिंह अब जिले में वन संरक्षण, पौधरोपण अभियानों, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गोरखपुर क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने, अवैध कटान पर नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को गति देने की दिशा में नए डीएफओ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शासन की मंशा विभागीय कार्यों को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की है।
वन निगम में भी बदली जिम्मेदारियां
तबादला सूची में उत्तर प्रदेश वन निगम, गोरखपुर से जुड़े अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। यहां तैनात क्षेत्रीय प्रबंधक ए.के. कश्यप का तबादला कर उन्हें लखनऊ भेजा गया है। अब वे राजधानी में क्षेत्रीय प्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। इसके साथ ही गोरखपुर में वन निगम की जिम्मेदारी नए अधिकारी को सौंप दी गई है।
विभागीय कार्यों को मिलेगी गति
शासन ने गोरखपुर स्थित शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान के निदेशक सूरज को अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी है। वह अपने वर्तमान पद के साथ-साथ उत्तर प्रदेश वन निगम, गोरखपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे। इससे वन निगम और प्राणी उद्यान से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है। शासन की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों का मानना है कि इस प्रशासनिक बदलाव से वन संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और विकास योजनाओं के संचालन में नई ऊर्जा मिलेगी। इससे विभागीय कार्यों को और अधिक गति प्राप्त होगी।
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