गोरखपुर के डीडीयू में गुआक्टा का आमरण अनशन शुरु: आठ मांगों पर 600 शिक्षक धरने पर, लेट फीस पेनल्टी का विरोध

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। गोरखपुर यूनिवर्सिटी एफिलिएटेड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (गुआक्टा) के पदाधिकारियों ने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार दोपहर तीन बजे से प्रशासनिक भवन में आमरण अनशन शुरू किया। मंगलवार को भी शिक्षक धरने पर डटे रहे और कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन के खिलाफ नारेबाजी की। आंदोलन में गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर के 21 कॉलेजों के करीब 600 शिक्षक शामिल हैं। शिक्षकों का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गुआक्टा के महामंत्री प्रोफेसर निरंकार राम त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कॉलेजों पर लेट फीस के नाम पर लाखों रुपये की पेनल्टी लगा दी गई है, जबकि कॉलेजों की ओर से शुल्क समय पर जमा किया गया था। उनका कहना है कि सर्वर डाउन होने के कारण कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं हो सके थे। उन्होंने दावा किया कि दीक्षांत समारोह से पहले कुलपति ने पेनल्टी माफ करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में इसे राजभवन से जुड़ा मामला बताया जाने लगा।
एसोसिएशन ने राशि वापस करने की मांग की
प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक, मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी पर 42 लाख रुपये और देवरिया के बीआरडी पीजी कॉलेज पर 14 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। इसके अलावा बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर ने पिछले वर्ष 1.35 लाख रुपये का विलंब शुल्क जमा किया था। एसोसिएशन ने यह राशि वापस करने की भी मांग की है।
आठ मांगों पर अड़े शिक्षक
गुआक्टा की प्रमुख मांगों में संबद्ध महाविद्यालयों को शोध केंद्र का दर्जा देना, शोधार्थियों के आवंटन में पारदर्शिता लाना, शिक्षकों के लंबित देयकों का भुगतान, अनुचित दंड शुल्क वापस करना और विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में महाविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसरों को उचित प्रतिनिधित्व देना शामिल है। इसके अलावा जेबी महाजन महाविद्यालय के प्राचार्य का निलंबन वापस लेने, कुशीनगर के बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय का जमा विलंब शुल्क लौटाने और शुल्क स्थानांतरित न होने के कारण रोकी गई शोधार्थियों की डिग्रियां जारी करने की मांग की गई है।
कुलपति बोलीं- एसोसिएशन को रिव्यू का अधिकार नहीं
कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि कॉलेजों पर लगाए गए फाइन का मामला एसोसिएशन की समस्या नहीं है और एसोसिएशन को लेट फीस के खिलाफ क्लेम या रिव्यू करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि रिव्यू का अधिकार न तो कार्यपरिषद और न ही कुलपति के पास है। उनके अनुसार, संबंधित कॉलेजों में से एक का मामला पहले ही कुलाधिपति के पास भेजा जा चुका है और वह फिलहाल विचाराधीन है। प्रोफेसर निरंकार राम त्रिपाठी ने बताया कि चार अगस्त को मांगें पूरी नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद सोमवार से अनशन शुरू किया गया। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर समाधान नहीं होता, प्रदर्शन जारी रहेगा।










