रामगढ़ताल में जल्द शुरू होगी बोटिंग: हाईटेक सुरक्षा के साथ संचालन की तैयारी, दो समितियों की रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

रामगढ़ताल में रविवार को दो नावों की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत के बाद बंद की गई बोटिंग सेवा को दोबारा शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। जिला प्रशासन और जीडीए ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के बाद इस सप्ताहांत से सीमित स्तर पर बोटिंग शुरू करने की योजना बना रहे हैं। प्रारंभिक चरण में केवल प्लेटफॉर्म नंबर-एक और छह से नावों का संचालन प्रस्तावित है। वहीं, प्लेटफॉर्म नंबर-चार और पांच पर सुरक्षा मानकों की जांच पूरी होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
हादसे के बाद डीएम दीपक मीणा की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति और जीडीए की चार सदस्यीय समिति अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। दोनों समितियां सुरक्षा इंतजाम, बोट चालकों के लाइसेंस, अनुबंध की शर्तों के पालन और दुर्घटना के कारणों की समीक्षा कर रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि शुक्रवार तक दोनों रिपोर्ट मिल जाएंगी। रिपोर्ट के आधार पर बोटिंग शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
स्पीड बोट संचालन पर होगी सख्ती
जीडीए ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई संचालन व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत शाम ढलने के बाद किसी भी प्लेटफॉर्म से स्पीड बोट नहीं चल सकेगी। सामान्य मोटर बोट का संचालन भी रात नौ बजे तक ही सीमित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने और जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
एआई कैमरे और जियो फेंसिंग से होगी निगरानी
रामगढ़ताल में पहली बार एआई आधारित स्पीड कैमरे लगाए जाएंगे, जो नावों की गति पर लगातार नजर रखेंगे। इसके साथ ही जियो फेंसिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि प्रत्येक प्लेटफॉर्म की नावें निर्धारित रूट से बाहर न जा सकें। पानी में ब्लिंकिंग लाइट भी लगाई जाएंगी। इससे रात के समय नाव चालकों को सुरक्षित मार्ग दिखाई देता रहे। एआई कैमरे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाली नावों की भी पहचान करेंगे।
जल पुलिस चौकी की भी है योजना
भविष्य में रामगढ़ताल पर जल पुलिस चौकी स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे नियमित गश्त, निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके। जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि यदि जांच रिपोर्ट संतोषजनक रही तो निर्धारित सुरक्षा शर्तों के साथ इस सप्ताहांत से बोटिंग दोबारा शुरू कर दी जाएगी। साथ ही हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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