जमीन विवाद में घर में तोड़फोड़: गर्भवती महिला से की मारपीट, पार्षद प्रतिनिधि समेत 11 नामजद

गोरखपुर|1 घंटा पहले
गर्भवती महिला से की मारपीट, पार्षद प्रतिनिधि समेत 11 नामजद

एम्स थाना क्षेत्र के झरना टोला में जमीन विवाद को लेकर घर में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और बिजली कनेक्शन उखाड़ने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो के बाद पुलिस ने वार्ड-18 के पार्षद प्रतिनिधि समेत 11 नामजद और 20-30 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। नव्य जागरण वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

एम्स थाना क्षेत्र के झरना टोला निवासी मंजू देवी ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में लोग उनके पैतृक मकान पर पहुंचे और जबरन तोड़फोड़ शुरू कर दी। शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने मकान की दीवारें क्षतिग्रस्त कर दीं, घर में रखा सामान बाहर फेंक दिया और बिजली का कनेक्शन काटकर मीटर भी उखाड़ लिया। विरोध करने पर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की गई। मंजू देवी की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है।

गर्भवती महिला के घायल होने का दावा

तहरीर के अनुसार, मारपीट के दौरान नौ माह की गर्भवती पुष्पा देवी को पेट में चोट लगी। इससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने पहले उन्हें एक निजी अस्पताल पहुंचाया। जहां से बाद में एम्स रेफर किया गया। वहां ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांचें की गईं। डॉक्टरों ने दोबारा जांच के लिए बुलाया है। पुष्पा देवी का आरोप है कि उन्हें धक्का देने से वह दीवार से टकराकर गिर गईं। जब उनके पति सुमित निषाद बचाने पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। मंजू देवी ने पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद पर बाल पकड़कर जमीन पर पटकने तथा चंद्र प्रकाश राय पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुआ केस

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बाद में पुलिस ने पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद, राकेश यादव, पिंटू यादव, बबलू राय, मुत्रा सिंह, उज्ज्वल निषाद, योगेश, टाइगर निषाद, भोलू निषाद, जितू निषाद और अतुल निषाद समेत 11 लोगों को नामजद करते हुए 20 से 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर शांति भंग की आशंका में भी कार्रवाई की है।

2011 से चल रहा है भूमि विवाद

पीड़ित परिवार का दावा है कि विवादित भूमि पर उनका तीन पीढ़ियों से कब्जा है और वर्ष 2011 से विवाद चल रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 2005 में परिसर की बाउंड्री कराई गई थी और 2013 में मकान का निर्माण कराया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि करीब 20 हजार रुपये नकद, टीवी, फ्रिज, कूलर, बिजली का मीटर और अन्य घरेलू सामान भी क्षतिग्रस्त या गायब हो गया। लगभग 25 डिसमिल भूमि की वर्तमान कीमत दो से ढाई करोड़ रुपये बताई गई है।

पार्षद प्रतिनिधि ने आरोपों को नकारा

उधर, पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि भूमि विवाद पहले से लंबित है। वह मामले में बाद में विस्तार से अपना पक्ष रखेंगे। एम्स थानाध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने बताया कि वायरल वीडियो, भूमि विवाद, तोड़फोड़ और मारपीट समेत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई होगी।

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