गोरखपुर में नाली का प्लास्टिक कचरा तुरंत पहचानेगा एआई: रोबोटिक आर्म हर घंटे हटाएगा 900 टुकड़े, एमएमएमयूटी के शोधकर्ताओं को मिली बड़ी कामयाबी

गोरखपुर|
रोबोटिक आर्म हर घंटे हटाएगा 900 टुकड़े,  एमएमएमयूटी के शोधकर्ताओं को मिली बड़ी कामयाबी

शहरों की नालियों में बहते प्लास्टिक कचरे की सफाई अब तकनीक की मदद से आसान हो सकती है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और दिल्ली टेक्निकल विश्वविद्यालय के चार शोधकर्ताओं ने ऐसा एआई आधारित सिस्टम तैयार किया है, जो पानी की सतह पर बह रहे प्लास्टिक की पहचान कर उसे रोबोटिक आर्म से बाहर निकाल सकेगा। परीक्षण के दौरान सिस्टम ने प्लास्टिक कचरे की पहचान में 97.4 प्रतिशत सटीकता हासिल की है। भारत सरकार ने इस तकनीक को पेटेंट भी दिया है। जेटसन एज डिवाइस और वास्तविक नाली के पानी में भी सिस्टम की पहचान क्षमता का सफल परीक्षण किया जा चुका है।

इस सिस्टम को डॉ. अभिषेक वर्मा, दिनेश कुमार विश्वकर्मा, सुमित कुमार और प्रतीक सैनी ने विकसित किया है। डॉ. अभिषेक वर्मा एमएमएमयूटी के कंप्यूटर साइंस विभाग में सहायक आचार्य हैं, जबकि अन्य तीन शोधकर्ता दिल्ली टेक्निकल विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। डॉ. अभिषेक के अनुसार, इस तकनीक को 20 साल के लिए पेटेंट मिला है। अनुदान मिलने के बाद इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। सिस्टम में ट्रांसफॉर्मर और सीएनएन आधारित कंप्यूटर विजन मॉडल, कैमरा और रोबोटिक आर्म को एक साथ जोड़ा गया है। कैमरा नाली के पानी की तस्वीर या वीडियो लेगा, जिसके बाद एआई मॉडल उसमें मौजूद प्लास्टिक की पहचान करेगा।

4,000 से ज्यादा तस्वीरों से तैयार हुआ मॉडल

शोधकर्ताओं ने सिस्टम को 1,000 से अधिक शहरी और ग्रामीण स्थानों से जुटाई गई 4,000 से ज्यादा वास्तविक प्लास्टिक कचरे की तस्वीरों से प्रशिक्षित किया है। इन तस्वीरों का विशेषज्ञों ने सत्यापन भी किया। एआई मॉडल प्लास्टिक की बनावट, चमक, आकार और ज्यामिति के आधार पर उसकी पहचान करता है और उसे पत्ते तथा लकड़ी जैसे जैविक कचरे से अलग कर सकता है। कम रोशनी में सिस्टम को संचालित करने के लिए आईआर या नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे अलग-अलग परिस्थितियों में सिस्टम की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।

एक बार में दो किलोग्राम तक उठा सकेगा भार

सिस्टम की खासियत यह है कि पहचान के बाद प्लास्टिक को बाहर निकालने का काम भी रोबोटिक आर्म करेगा। डॉ. अभिषेक के अनुसार, रोबोट एक घंटे में करीब 600 से 900 प्लास्टिक के टुकड़े उठा सकता है। हालांकि, वास्तविक क्षमता नाली के आकार और इस्तेमाल किए जाने वाले रोबोटिक आर्म पर निर्भर करेगी। सामान्य परिस्थितियों में यह एक बार में 500 ग्राम से दो किलोग्राम तक भार उठा सकेगा। मॉड्यूलर फ्रेम की मदद से सिस्टम को नालियों के ऊपर स्थापित किया जा सकेगा। सोलर पैनल से इसकी बैटरी चार्ज होगी, जबकि आईओटी डैशबोर्ड बिन भरने या सिस्टम में खराबी आने पर अलर्ट देगा।

पानी में कचरे की जगह तय कर उठाएगा आर्म

शोधकर्ताओं के मुताबिक, सिस्टम का पूरा सिद्धांत ‘पहचानो और उठाओ’ पर आधारित है। कैमरा नाली के पानी की तस्वीर या वीडियो कैप्चर करेगा। इसके बाद गहन शिक्षण मॉडल प्लास्टिक कचरे की पहचान करेगा। प्लास्टिक की स्थिति और पानी में उसकी गहराई के आधार पर रोबोटिक आर्म के लिए उठाने की जगह तय की जाएगी। सही स्थान निर्धारित होने के बाद आर्म ग्रिपर की मदद से प्लास्टिक को पकड़ेगा और उसे निर्धारित बिन में डाल देगा। इस तरह नालियों में बहते प्लास्टिक को पानी में जाने से पहले ही अलग करने की दिशा में सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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