MMMUT के दीक्षांत समारोह में 20 मेधावियों को मिले 46 स्वर्ण पदक: राज्यपाल ने उपलब्धियां सराहीं, नशा और अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी

गोरखपुर|
राज्यपाल ने उपलब्धियां सराहीं, नशा और अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। समारोह में 20 मेधावियों को कुल 46 गोल्ड मेडल दिए गए। अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, छात्र-छात्राओं की प्रतिभा और महिला सशक्तीकरण की सराहना की। साथ ही युवाओं से चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष 60 प्रतिशत छात्राओं और 40 प्रतिशत छात्रों को उपाधियां मिली हैं, जो बेटियों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छा चरित्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना भी है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि सही अवसर मिलने पर यही बच्चे भविष्य में वैज्ञानिक, शिक्षक और जनप्रतिनिधि बनकर देश का नेतृत्व करेंगे।

जल संरक्षण और नशामुक्त गांवों का दिया संदेश

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांवों में नशामुक्ति अभियान चलाने का भी सुझाव दिया। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने उनकी प्रेरक कहानियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराने की घोषणा भी की।

व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर की विभिन्न कमियों पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने रमन बॉयज हॉस्टल के कूड़े में शराब की बोतलें और सिगरेट के पैकेट मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं, न कि नशे की आदतें सीखने के लिए। उन्होंने हॉस्टलों में फैली गंदगी, अधूरे निर्माण कार्य, अव्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर और आगंतुकों के लिए सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल उठाए।

छात्रों को शामिल कर निगरानी समिति बनाने के निर्देश

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में कमियों को दूर करने के लिए निगरानी समिति बनाई जाए, जिसमें एक-दो छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर ध्यान देने की जरूरत बताते हुए कहा कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से परिसर को स्वच्छ, व्यवस्थित और नशामुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा जताई।

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