गोरखपुर में मासूम की हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद: ईंट से हमला कर उतारा मौत के घाट, घर के बाहर खेल रहा था बच्चा

जिले में डेढ़ साल के मासूम दिव्यांश की ईंट से हमला कर हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी रंजीत उर्फ मास्टर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। करीब 23 महीने चली सुनवाई के बाद फैसला आया। सजा सुनाए जाने के दौरान बच्चे के परिजनों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि आरोपी को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए थी।
बांसगांव के भैंसारानी गांव निवासी राहुल यादव ने मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, 23 सितंबर 2024 की शाम उनका डेढ़ साल का बेटा दिव्यांश घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला रंजीत उर्फ मास्टर वहां पहुंचा और बच्चे को गोद में उठा लिया। आरोप है कि इसके बाद उसने बच्चे के सिर पर ईंट से कई वार कर दिए। बच्चे की दादी सुगना देवी उसे बचाने के लिए आगे आईं तो आरोपी ने उन्हें भी धक्का दे दिया। हमला करने के बाद आरोपी बच्चे को लहूलुहान हालत में छोड़कर वहां से चला गया।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई मौत
घटना के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और परिजन बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांसगांव ले गए। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन दिव्यांश को लेकर गोरखपुर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर की हड्डी टूटने को मौत की वजह बताया गया। पुलिस ने मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और जांच पूरी करने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
किसी को खुश देखकर हो जाता था नाराज
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना को लेकर पछतावा नहीं होने की बात कही थी। जांच में उसके मानसिक रूप से परेशान रहने की जानकारी भी सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, वह किसी को खुश देखकर नाराज हो जाता था। जेल में रहने के दौरान उसका इलाज भी कराया गया और कई महीनों तक उसे दवाएं दी गईं।
जिसे खाना खिलाया उसी ने बेटे की ली जान
दिव्यांश की मां नीतू ने बताया कि गांव में रंजीत को सभी ‘मास्टर’ के नाम से जानते थे। वह गांव में बच्चों को पढ़ाता था और अकेले रहता था। नीतू के अनुसार, जब भी रंजीत को भूख लगती थी, वह उसे खाना दे देती थीं। उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति की वह मदद करती हैं, वही उनके बच्चे की जान ले लेगा। दिव्यांश के भाई-बहन भी उसे आज तक याद करते हैं।
ऑपरेशन कनविक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
पुलिस ने मामले में साक्ष्य जुटाकर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। ऑपरेशन कनविक्शन के तहत अभियोजन की प्रभावी पैरवी की गई। DGC प्रियानंद सिंह और ADGC जयनाथ यादव की पैरवी के बाद अदालत ने आरोपी रंजीत उर्फ मास्टर को उम्रकैद और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।











