गोरखपुर में जल प्रबंधन मॉडल पर शहर को मिला वैश्विक सम्मान: आधुनिक तकनीक से खत्म हुआ जलभराव, डेढ़ घंटे में साफ होगा सड़कों का पानी

गोरखपुर|
आधुनिक तकनीक से खत्म हुआ जलभराव, डेढ़ घंटे में साफ होगा सड़कों का पानी

शहर में जलभराव से निपटने, जल स्रोतों के संरक्षण और बारिश के पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए किए जा रहे तकनीकी प्रयासों को वैश्विक पहचान मिली है। गोरखपुर नगर निगम को शहरी जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जीईईएफ ग्लोबल वाटर टेक अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल वाटर टेक समिट एंड अवार्ड 2026 में महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने यह सम्मान ग्रहण किया। नगर निगम को एकीकृत शहरी जल प्रबंधन परियोजना वर्ष 2026 श्रेणी में यह पुरस्कार मिला। कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव और सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।

महापौर ने बताया कि शहर में शहरी बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल बनाया गया है। इसके तहत जलस्तर की निगरानी, बारिश का पूर्वानुमान और जल निकासी व्यवस्था को एकीकृत किया गया है। शहर में 110 स्वचालित जलस्तर सेंसर लगाए गए हैं, जिनसे अलग-अलग क्षेत्रों में पानी के स्तर की लगातार निगरानी होती है। इसके साथ वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली, जल निकासी नेटवर्क का डिजिटल प्रतिरूप, वास्तविक समय निगरानी और स्वचालित पंपिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। नगर निगम के 25 प्रमुख पंपिंग स्टेशनों में से 21 को स्काडा आधारित स्वचालन प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। नगर निगम के अनुसार, इसका असर 2025 के मानसून में दिखा और जलभराव की औसत अवधि करीब 12 घंटे से घटकर डेढ़ घंटे से भी कम रह गई।

वेटलैंड से नैनोबबल तक प्रयोग

नगर निगम ने जल प्रबंधन में तकनीक के साथ प्रकृति आधारित समाधानों को भी अपनाया है। तकियाघाट में विकसित वेटलैंड में रॉक फिल्टर और स्थानीय वनस्पतियों की मदद से अपशिष्ट जल के उपचार का प्रयास किया जा रहा है। वहीं मोती पोखरा में नैनोबबल और अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए जल संरक्षण तथा गुणवत्ता सुधार पर काम हो रहा है। इन पहलों को नगर निगम के एकीकृत जल प्रबंधन मॉडल का हिस्सा बताया गया है।

चार हजार से अधिक वर्षाजल संचयन प्रणाली

महापौर के अनुसार, शहर में चार हजार से अधिक वर्षाजल संचयन प्रणालियां लगाई गई हैं। 100 से अधिक तालाबों और अन्य जल निकायों के पुनर्जीवन का काम भी किया गया है। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए रिचार्ज पिट और बोरवेल रिचार्ज को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके जरिए बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और उसके अधिकतम उपयोग पर जोर है। सफाई व्यवस्था को भी डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया है। सफाई मित्र कनेक्ट और नमस्ते कार्यक्रम के तहत 4,600 से अधिक स्वच्छता कर्मी डिजिटल प्रणाली से जुड़े हैं।

पैनल चर्चा में साझा किया गोरखपुर मॉडल

समिट में महापौर ने स्मार्ट और सतत जल प्रबंधन : वास्तविक प्रभाव देने वाली तकनीकों का विस्तार विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने गोरखपुर में तकनीक, प्रकृति आधारित समाधानों और जनभागीदारी के जरिए जल प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। सम्मेलन का विषय आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोत से सतत विकास तक नवाचार को बढ़ावा देना रखा गया था।

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