गोरखपुर में मूंगफली व्यापार में टैक्स चोरी: 99% कारोबारी चुप, रिमाइंडर नोटिस की तैयारी में विभाग

गोरखपुर|
99% कारोबारी चुप, रिमाइंडर नोटिस की तैयारी में विभाग

मूंगफली के कारोबार से जुड़े करीब 50 कारोबारियों को राज्य कर विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस का अधिकांश ने जवाब नहीं दिया है। विभाग ने सभी से 22 अगस्त तक जवाब मांगा था, लेकिन अब तक करीब 99 प्रतिशत कारोबारी जवाब देने से बच रहे हैं। खास बात यह है कि बिलिंग उन्हीं की फर्मों के नाम पर हुई है, फिर भी अधिकतर कारोबारी मूंगफली के माल का स्वामित्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। अब विभाग रिमाइंडर नोटिस भेजने की तैयारी में है।

शहर के विश्वनाथ कोल्ड स्टोरेज पर हुई कार्रवाई के बाद मूंगफली कारोबार में कथित फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया। जांच में आशंका जताई जा रही है कि फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर जीएसटी चोरी की गई। पड़ताल में सामने आया कि शाहजहांपुर से बंगाल और बिहार के लिए बिलिंग दिखाई जा रही थी, जबकि मूंगफली का माल गोरखपुर में ही उतारा जा रहा था। राज्य कर विभाग अब संबंधित फर्मों के बीच हुए लेनदेन और बिलिंग पैटर्न की जांच कर रहा है। जांच में अहमद राइस मिल और सोनाली ट्रेडिंग कंपनी, अल्लाहगंज (शाहजहांपुर) से जुड़े लेनदेन भी सामने आए हैं। इनमें राजीव स्पाइसेज, स्नेहलता कॉरपोरेशन, सिद्धि विनायक ट्रेडर्स, वीर ट्रेडर्स और नादिया (पश्चिम बंगाल) की सिद्धि विनायक ट्रेडर्स समेत कई फर्मों के नाम शामिल हैं। विभाग इन सभी फर्मों के बीच हुए कारोबार की कड़ियां खंगाल रहा है।

करीब 50 लाख की टैक्स चोरी

बरेली की एसआईबी टीम ने अल्हागंज की सोनाली ट्रेडिंग कंपनी और अहमद राइस मिल पर छापा मारा था। जांच के दौरान मूंगफली की 10 करोड़ रुपये से अधिक की बिलिंग सामने आई, जबकि करीब 50 लाख रुपये की कर चोरी भी पकड़ी गई। दोनों फर्मों से गोरखपुर की सिद्धि विनायक ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये की मूंगफली की बिक्री दिखाई गई थी। इसी दौरान गोरखपुर के सचल दल ने शाहजहांपुर के यादव ट्रांसपोर्ट के एक ट्रक को रोका। उसके पास बिहार जाने का ई-वे बिल था, लेकिन वाहन खाली मिला और वह बिहार गया ही नहीं था। पूछताछ में पता चला कि ट्रक में लदा माल गोरखपुर के विश्वनाथ कोल्ड स्टोरेज में उतारा गया था। टोल रिपोर्ट की जांच में भी कई वाहन ऐसे मिले, जो गोरखपुर से आगे गए ही नहीं थे। इससे सिर्फ बिलों के जरिए लेनदेन किए जाने का संदेह और गहरा गया।

भाजपा नेता के गोदाम को लेकर भी चर्चा

भाजपा ने महानगर कार्यकारिणी की सूची जारी की थी, जिसमें मनीष जैन को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके अगले दिन उनके गोदाम पर छापे की चर्चा सामने आने से पार्टी पदाधिकारियों के बीच भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, मनीष जैन ने छापे और अपनी फर्म पर किसी कार्रवाई से इनकार किया है। उनका कहना है कि गोदाम उन्होंने किराए पर दिया है, लेकिन वह यह नहीं बता रहे कि गोदाम किसे किराए पर दिया गया। बाजार में चर्चा है कि जिस फर्म को गोदाम किराए पर दिया गया है, उसका नाम भी मूंगफली से जुड़े मामले में सामने आया है। मनीष जैन ने मूंगफली कारोबार से जुड़े किसी मामले की जानकारी होने से भी इनकार किया है।

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