गोरखपुर में निवेश के नाम पर 80 लाख की ठगी: एप बंद होते ही खुली पोल, पुणे की कंपनी बताकर जीता था भरोसा

गोरखपुर|
एप बंद होते ही खुली पोल, पुणे की कंपनी बताकर जीता था भरोसा

शहर में कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा देकर दर्जनों लोगों से करीब 80 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पुणे की कंपनी और शहर के GDA टॉवर में उसका कार्यालय होने की जानकारी देकर लोगों का भरोसा जीता। फर्जी दस्तावेज और कई बैंक खातों का विवरण दिखाकर निवेश के लिए तैयार किया गया। इसके बाद पीड़ितों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक और रकम ली गई। निवेश की स्थिति देखने के लिए एक एप डाउनलोड कराया गया। कुछ महीने बाद एप और सभी आईडी बंद हो गईं। रकम वापस मांगने पर तकनीकी खराबी और एप अपग्रेड होने की बात कही गई। बाद में आरोपियों पर धमकी देने का भी आरोप लगा। मामले में कैंट थाने में छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

गोरखपुर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में रहने वाले गौरव कुमार, देवेश वैश्य, पुनीत कुमार पांडेय, विश्वजीत सिंह, रितेश प्रताप, अभिषेक प्रताप शाही, आदित्य विक्रम शाही, मनोज कुमार, धर्मेन्द्र गुप्ता, सुनील गुप्ता और संतोष कुमार यादव ने कैंट थाने में तहरीर दी। उन्होंने गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रामजानकी नगर निवासी जितेन्द्र सिंह, कूड़ाघाट-मुलायम नगर सिंघड़िया निवासी मणिशंकर पाल, पुणे के एनआर सनशाइन पार्क बालेवडी निवासी गणेश गोडसे, महराजगंज के विशुनपुर खुर्द छपिया निवासी राजकुमार, गोरखनाथ क्षेत्र की आजाद नगर कॉलोनी निवासी सर्वेश सिंह और खजनी थाना क्षेत्र के भगवानपुर भीटी, भौवापार निवासी नरेन्द्र सिंह पर आरोप लगाए हैं।

कम समय में दोगुनी हो जाएगी रकम

पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों से उनके पुराने मित्रवत संबंध थे। जून में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने फिबिट इनफोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी पुणे के कुछ लोगों के साथ साझेदारी में शुरू की है। कंपनी की मुख्य शाखा पुणे में और एक शाखा गोरखपुर के GDA टॉवर में बताई गई। आरोपियों ने दावा किया कि कंपनी में पैसा लगाने पर कम समय में रकम दोगुनी हो जाएगी।

ब्लैंक चेक लेकर खुलवाई आईडी

पीड़ितों का आरोप है कि भरोसा कायम करने के लिए आरोपियों ने अलग-अलग फर्जी दस्तावेज और कई बैंक खातों का विवरण भी दिखाया। निवेश की प्रक्रिया डिजिटल बताई गई। इसके लिए अकाउंट और आईडी बनाने के नाम पर पैन कार्ड, आधार कार्ड, फोटो और हस्ताक्षर किया हुआ ब्लैंक चेक मांगा गया। कहा गया कि आईडी बंद होने पर सभी दस्तावेज वापस कर दिए जाएंगे।

डाउनलोड कराया एप

आरोपियों ने यह भी बताया कि कंपनी इंटरनेशनल लेवल पर काम करती है और निवेश डॉलर में किया जाता है। इसके लिए नकद या UPI के जरिए रकम देने को कहा गया। आरोप है कि उन्होंने रुपये को डॉलर में बदलकर निवेश करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद एक एप डाउनलोड कराया गया, जिसमें प्रत्येक निवेशक की आईडी लॉगिन थी। आरोपियों ने कहा कि एप के जरिए निवेश की बढ़ोतरी कभी भी देखी जा सकती है।

एप बंद हुआ तो मांगने लगे रकम वापस

पीड़ितों के मुताबिक, निवेश के कुछ महीने बाद कंपनी का एप बंद हो गया और सभी आईडी भी हटा दी गईं। जानकारी मांगने पर आरोपियों ने तकनीकी खराबी और एप अपग्रेड होने की बात कहकर जल्द व्यवस्था बहाल होने का भरोसा दिया। कई महीने इंतजार के बाद भी जब स्थिति नहीं सुधरी तो पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की।

फोन उठाना किया बंद

आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय आरोपी बार-बार समय देते रहे और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया। दबाव बढ़ने पर झूठे मुकदमे में फंसाने, आईडी बनाते समय दिए गए ब्लैंक चेक का गलत इस्तेमाल करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पीड़ितों ने दावा किया कि शहर और आसपास के सैकड़ों अन्य लोग भी इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये निवेश कर चुके हैं। उनका आरोप है कि कंपनी से जुड़े अन्य लोगों ने देशभर में हजारों लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के नाम पर जुटाए हैं।

छह नामजद के खिलाफ एफआईआर

कैंट थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पीड़ितों की तहरीर के आधार पर छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की आगे जांच की जा रही है।

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