गोरखपुर में जन्माष्टमी में जन्मा बेटा, चार दिन बाद पिता की मौत: अस्पताल के रैंप पर रात में सोए, सुबह नहीं उठे

गोरखपुर|
अस्पताल के रैंप पर रात में सोए, सुबह नहीं उठे

शहर के ग्रीनलैंड हॉस्पिटल में बेटे के जन्म की खुशी चार दिन बाद ही मातम में बदल गई। कैंपियरगंज निवासी युवक की मंगलवार सुबह अस्पताल के रैंप पर मौत हो गई। वह तीन सितंबर को पत्नी की डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचे थे। जन्माष्टमी के दिन पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। मां और नवजात दोनों स्वस्थ थे और अस्पताल में भर्ती थे। सोमवार रात तक परिवार में सब सामान्य था। रात करीब 10:30 बजे खाना खाने के बाद आशुतोष अस्पताल के रैंप पर सोने चले गए। मंगलवार सुबह काफी देर तक नहीं उठे तो सास ने उन्हें आवाज देकर जगाने की कोशिश की। कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर अस्पताल स्टाफ को सूचना दी गई। जांच के बाद कर्मचारियों ने आशुतोष को मृत पाया।

आशुतोष पत्नी को प्रसव के लिए तीन सितंबर को अस्पताल लेकर आए थे। परिवार लंबे समय से बेटे के जन्म का इंतजार कर रहा था। जन्माष्टमी पर बेटे के जन्म के बाद घर में खुशी का माहौल था। मां और नवजात की तबीयत ठीक होने से परिवार पूरी तरह निश्चिंत था। सोमवार को भी आशुतोष ने परिवार के साथ समय बिताया। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और अस्पताल में भर्ती पत्नी का हाल जाना। रात में भोजन करने के बाद करीब 10:30 बजे वह रैंप पर जाकर सो गए। सुबह काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो उनकी सास को चिंता हुई।

डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

सास ने पहले आशुतोष को आवाज देकर जगाने का प्रयास किया। जवाब नहीं मिलने पर वह उनके पास गईं और दोबारा उठाने की कोशिश की। इसके बाद परिवार के अन्य लोगों को जानकारी दी गई और अस्पताल कर्मचारियों को बुलाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर गुलरिहा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का वास्तविक कारण सामने आएगा।

परिवार में पसरा मातम

आशुतोष परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य थे। वह इन्वर्टर-बैटरी कंपनी में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था, ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियां मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थीं। अब पत्नी खुशबू के सामने तीन बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी है। परिवार में 12 वर्षीय बेटी आराध्या, सात वर्षीय बेटी निम्मी और कुछ दिन पहले जन्मा बेटा है। अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डालने के साथ बच्चों की परवरिश और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर भी संकट खड़ा कर दिया है।

नव्य जागरण

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