DDU में छात्र नेताओं का अनशन खत्म: विश्विद्यालय के शिक्षकों ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया, 2027-28 से एडमिशन की मिली मंजूरी

गोरखपुर|

डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन में 15 दिन से चल रहा छात्र नेताओं का धरना खत्म हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र नेताओं की मांगों पर सहमति जताते हुए उनका निष्कासन रद्द करने का फैसला किया। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने स्पष्ट किया कि छात्र नेताओं को कैंपस में किसी भी तरह की शैक्षणिक विरोधी गतिविधि या अनुशासनहीनता नहीं करने की शर्त पर यह राहत दी गई है। सभी संबंधित छात्र नेता सत्र 2027-28 से विश्वविद्यालय में दोबारा प्रवेश ले सकेंगे। पांच सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं को विश्विद्यालय के शिक्षकों ने जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया।

निष्कासन रद्द होने और दोबारा प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद छात्र नेताओं में खुशी नजर आई। सभी छात्र विश्वविद्यालय के गेट पर एकजुट हुए और जश्न मनाया। इस दौरान उन्होंने उस दरोगा के साथ भी फोटो खिंचवाई, जिसने पहले प्रदर्शन के दौरान छात्रों को हड़काया था। छात्र नेताओं ने उसके साथ फोटो खिंचवाने के बाद जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

25 अगस्त से शुरू हुआ था प्रदर्शन

छात्र नेता 25 अगस्त की दोपहर छह मांगों को लेकर प्रशासनिक भवन में धरने पर बैठे थे। सूचना पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। छात्रों को समझाने के दौरान दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई और कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद पांच सितंबर से छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी।

भ्रष्टाचार से लेकर पेड़ों की कटान तक उठाए सवाल

प्रदर्शनकारी छात्रों ने ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ’ जैसे नारों वाले पोस्टर और बैनर लगाए थे। छात्र नेता सतीश प्रजापति ने विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने छात्र नेताओं के निलंबन पर सवाल उठाते हुए परीक्षा एजेंसी की कथित अवैध वसूली की जांच की मांग की। इसके अलावा छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद शुल्क लिए जाने, परिसर में पेड़ों की कथित अवैध कटान और PMUSHA के तहत चल रहे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की जांच की मांग भी उठाई गई।

विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष नहीं आया

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें छात्रहित से जुड़ी हैं और इन्हीं मुद्दों को लेकर वे लगातार आवाज उठा रहे थे।

नव्य जागरण

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