गोरखपुर के रामगढ़ताल में उतरेंगे तीन नैनो बबल जनरेटर: पानी में बढ़ेगी ऑक्सीजन, तीनों प्रवेश द्वार होंगे लैस

रामगढ़ताल की बिगड़ती जल गुणवत्ता सुधारने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण अब नैनो बबल तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईटी मंडी के साथ ज्वाइंट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। योजना के पहले चरण में ताल के तीन प्रवेश द्वारों पर नैनो बबल जनरेटर लगाए जाएंगे। इनसे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने, दुर्गंध और शैवाल की समस्या कम करने तथा जल गुणवत्ता सुधारने का प्रयास होगा। प्राधिकरण का लक्ष्य भविष्य में ताल के पानी को नहाने योग्य बनाना और यहां छठ घाट विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
GDA की योजना के तहत तीन नैनो बबल जनरेटर पैडलेगंज, आरकेबीके और सहारा एस्टेट की ओर स्थित ताल के तीन प्रवेश द्वारों पर लगाए जाएंगे। इनका संचालन बिजली से होगा और इसके लिए विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रथम चरण में तीनों जनरेटर लगाने पर करीब सवा करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। GDA इसके लिए आईआईटी मंडी के साथ एमओयू करने की तैयारी में है। जनरेटर शुरू होने के बाद पानी की गुणवत्ता में होने वाले बदलाव की नियमित निगरानी भी की जाएगी।
गर्मियों में बढ़ जाती है ऑक्सीजन की समस्या
रामगढ़ताल में गर्मियों के दौरान ऑक्सीजन की समस्या बढ़ जाती है। ताल में कई नाले अब भी बिना टैपिंग के गिर रहे हैं, जिससे लगातार गंदगी पहुंचती है। इससे पानी के सड़ने के साथ दुर्गंध की समस्या बढ़ती है। ऑक्सीजन की कमी से मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है और ताल के किनारों पर अक्सर मृत मछलियां दिखाई देती हैं। जुलाई 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में भी पानी में जैविक ऑक्सीजन मांग और रासायनिक ऑक्सीजन मांग का स्तर अधिक मिला था।
बिना रसायन पानी में पहुंचाई जाएगी ऑक्सीजन
नैनो बबल तकनीक में बेहद छोटे गैस बुलबुलों के जरिए पानी की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाता है। इसमें रसायनों के बजाय ऑक्सीजन, ओजोन या सामान्य हवा जैसी गैस को विशेष जनरेटर के माध्यम से पानी में मिलाया जाता है। ये बुलबुले करीब 50 से 200 नैनोमीटर आकार के हो सकते हैं। सामान्य बुलबुलों की तुलना में बेहद छोटे होने के कारण ये पानी में लंबे समय तक बने रहते हैं और पूरे जल क्षेत्र में फैल सकते हैं। तकनीक का उद्देश्य पानी के निचले स्तर तक ऑक्सीजन पहुंचाना और जल में मौजूद जैविक गतिविधियों को प्रभावित करना है।
गंदगी और शैवाल पर भी असर का दावा
नैनो बबल की सतह पर मौजूद ऋणात्मक आवेश पानी में मौजूद कुछ सूक्ष्म कणों, शैवाल और अन्य पदार्थों के साथ संपर्क बनाता है। इससे पानी में तैरने वाले बारीक कणों को हटाने में मदद मिल सकती है। पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ने से जलीय जीवों के लिए परिस्थितियां बेहतर होने की उम्मीद है। GDA की कार्ययोजना में नैनो बबल के साथ जल गुणवत्ता की नियमित जांच, प्रदूषित पानी के प्रवेश पर नियंत्रण और ताल में जैविक गंदगी की निगरानी भी शामिल होगी।
प्रभाव की होगी लगातार निगरानी
तीनों स्थानों पर जनरेटर लगाए जाने के बाद इनके प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि रामगढ़ताल जैसे बड़े जलाशय में यह तकनीक जल गुणवत्ता सुधारने में कितनी प्रभावी रहती है। GDA के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि रामगढ़ताल को साफ करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में नैनो बबल तकनीक का इस्तेमाल होगा। इससे ताल की गंदगी और दुर्गंध कम करने का प्रयास किया जाएगा। कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है और लक्ष्य ताल के पानी को नहाने योग्य बनाना है।











