गोरखपुर में मनाया गया प्रेमचंद जयंती सप्ताह: साहित्यकारों ने रखे विचार, युवा कवियों ने किया पाठ

शहर में प्रेमचंद पार्क में प्रेमचंद जयंती सप्ताह के तहत आयोजित 'प्रेमचंद के सपनों का देश' विषयक कार्यक्रम में साहित्यकारों ने प्रेमचंद के साहित्य की मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे। इस दौरान कहानी पाठ, काव्य पाठ और परिचर्चा का आयोजन हुआ।
प्रेमचंद जयंती सप्ताह के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कहानीकार लालबहादुर और ओंकार त्रिपाठी की कहानियों के पाठ से हुई। इसके बाद दीपक यादव, अवनीश, संजना, शालिनी, योगेन्द्र पांडेय, नीलकमल, यशवन्त राव, सुनीता पाल, सिद्धार्थ शुक्ला, अंकिता सिंह और राजरतन त्रिपाठी सहित युवा कवियों ने काव्य पाठ किया। वरिष्ठ कवि देवेन्द्र आर्य ने कहा कि युवा रचनाकार साहित्य और समाज की महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं तथा नई पीढ़ी का लेखन भविष्य के प्रति विश्वास जगाता है।
प्रेमचंद के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा
प्रमोद कुमार ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय समाज के संघर्ष और सपनों के साहित्यकार हैं। प्रेमचंद साहित्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश मल्ल ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं मानवता, न्यायबोध और स्त्री उत्थान की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। स्वदेश सिन्हा ने कहा कि आजादी सबसे बड़ा मूल्य है और प्रेमचंद का साहित्य हर तरह के औपनिवेशिक सोच से मुक्ति का संदेश देता है। अशोक चौधरी ने कहा कि भारतीय समाज की मूल समस्याएं आज भी बनी हुई हैं, इसलिए प्रेमचंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। कार्यक्रम का संचालन अजय कुमार सिंह, निखिल पांडेय और आनन्द पांडेय ने किया। आयोजन प्रेमचंद साहित्य संस्थान के साथ प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, आयाम, गतिविधि और इप्टा के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









