सरयू कटान रोकने के लिए तेज हुआ बचाव कार्य: 20.70 करोड़ की परियोजना पर काम जारी, 30 जून तक 2120 मीटर क्षेत्र सुरक्षित करने का लक्ष्य

सरयू नदी के बढ़ते कटान से प्रभावित बड़हलगंज क्षेत्र में अब स्थायी समाधान की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग ज्ञानकोल पटना से बगहा गांव तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में कटानरोधी परियोजना पर युद्धस्तर पर कार्य कर रहा है। गांवों की आबादी, खेती योग्य जमीन और महत्वपूर्ण रामजानकी मार्ग को बचाने के लिए भारी मशीनों और आधुनिक संसाधनों की मदद से दिन-रात काम जारी है। विभाग का लक्ष्य 30 जून तक 2120 मीटर लंबे क्षेत्र में सुरक्षा कार्य पूरा करना है, ताकि आगामी मानसून के दौरान नदी के तेज बहाव से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
बगहा गांव में वर्ष 2024 से सरयू नदी का कटान तेजी से शुरू हुआ था। शुरुआती बचाव प्रयासों के बावजूद नदी की तेज धारा ने प्राथमिक विद्यालय सहित मूसाडोही और बगहा देवार टोला के कई मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। अगस्त 2025 में कुछ समय के लिए कटान की रफ्तार धीमी हुई, लेकिन इसके बाद नदी ने अपना रुख बदल लिया और ज्ञानकोल, पटना, पटना मुस्तकिल, पटना एहतमाली, दिस्तौलिया तथा नेतवार पट्टी जैसे राजस्व गांवों की ओर बढ़ने लगी। हालात इतने गंभीर हो गए कि ज्ञानकोल गांव की आबादी तक नदी पहुंच गई और ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
सांसद के निरीक्षण के बाद तेज हुआ बचाव अभियान
कटान की भयावह स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। 24 अगस्त को क्षेत्रीय सांसद ने बगहा और ज्ञानकोल पटना क्षेत्र का दौरा कर हालात का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग को तत्काल प्रभाव से बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उसी दिन से पत्थर, जियोट्यूब और अन्य सामग्री गिराने का कार्य शुरू कर दिया गया। अगस्त से नवंबर के बीच विभाग ने अस्थायी बचाव कार्य करते हुए करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में कटान को नियंत्रित करने की कोशिश की। इससे नदी की तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन इसके बावजूद ज्ञानकोल गांव के 11 मकान नदी में समा गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी परियोजना शुरू नहीं होती तो कई और गांव खतरे की जद में आ सकते थे।
138 ठोकरों और स्थायी पिचिंग का निर्माण
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने शासन को 20 करोड़ 70 लाख रुपये की विस्तृत परियोजना भेजी थी, जिसे मंजूरी मिलने के बाद अब बड़े स्तर पर कार्य कराया जा रहा है। परियोजना के तहत ज्ञानकोल आबादी के सामने 220 मीटर पत्थर पिचिंग, बगहा गांव के सामने जियोट्यूब और बैग आधारित स्थायी पिचिंग का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए 138 ठोकरों का निर्माण भी किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह परियोजना नदी के बहाव को नियंत्रित करने और गांवों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पूर्व ग्राम प्रधान हृदयशंकर सिंह ने कहा कि लंबे समय से लोग कटान की समस्या से परेशान थे, लेकिन अब स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निर्धारित समय में काम पूरा हो गया तो हजारों लोगों की आबादी और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि सुरक्षित हो सकेगी।
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