गोरखपुर में 300 परिवारों को मिली बड़ी राहत: धर्मशाला बाजार भूमि विवाद पर लगी रोक, राजस्व कोर्ट करेगी अंतिम फैसला

गोरखपुर|
धर्मशाला बाजार भूमि विवाद पर लगी रोक, राजस्व कोर्ट करेगी अंतिम फैसला

धर्मशाला बाजार क्षेत्र में भूमि विवाद से प्रभावित करीब 300 मकान मालिकों को फिलहाल राहत मिल गई है। वर्षों से जिस जमीन पर लोग मकान बनाकर रह रहे हैं, उस भूमि की वरासत किसी अन्य के नाम दर्ज होने के बाद विवाद गहरा गया था। मामले के एसडीएम सदर के समक्ष पहुंचने पर सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अब राजस्व कोर्ट साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर अंतिम निर्णय करेगा।

धर्मशाला बाजार की 5.242 हेक्टेयर भूमि से जुड़े इस विवाद में दोनों पक्ष एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह के समक्ष उपस्थित हुए। यह वरासत नायब तहसीलदार के आदेश पर दर्ज की गई थी। दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद एसडीएम ने स्पष्ट किया कि मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को वर्तमान स्थिति में बदलाव करने की अनुमति नहीं होगी।

वरासत आदेश के विरोध में हुआ था प्रदर्शन

रविवार को जैसे ही क्षेत्र के लोगों को वरासत आदेश की जानकारी मिली, उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रभावित लोगों के प्रतिनिधिमंडल को सदर तहसील बुलाकर उनकी आपत्तियां सुनी गईं। लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर लंबे समय से सैकड़ों परिवार मकान बनाकर रह रहे हैं, उस पर पारित वरासत आदेश से बड़ी संख्या में लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

तब रिकॉर्ड में नहीं थी विवादित भूमि

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन नायब तहसीलदार नीरू सिंह ने जिस भूमि पर आदेश पारित किया, वह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला था। हालांकि संबंधित अधिकारी का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों और लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही नियमानुसार आदेश पारित किया गया था। उस समय रिकॉर्ड में भूमि को विवादित नहीं दर्शाया गया था।

कोर्ट के फैसले तक नहीं बदलेगी स्थिति

एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने कहा कि पूरा मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय राजस्व अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेश तक कोई भी पक्ष मौके की स्थिति में परिवर्तन नहीं करेगा। दोनों पक्षों ने इस व्यवस्था पर सहमति भी जताई है। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नव्य जागरण

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