मूर्तिकार भास्कर विश्वकर्मा ने लिया देहदान का संकल्प: कला के माध्यम से समाज को दिया योगदान, चिकित्सा शिक्षा के लिए करेंगे देहदान

गोरखपुर|
कला के माध्यम से समाज को दिया योगदान, चिकित्सा शिक्षा के लिए करेंगे देहदान

शहर के प्रख्यात मूर्तिकार और सुभसा स्कल्पटर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष भास्कर विश्वकर्मा ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने मृत्यु के उपरांत अपना शरीर एम्स गोरखपुर को दान करने का संकल्प लिया है। इसके लिए उन्होंने देहदान से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए लिखित सहमति भी प्रदान कर दी है। उनके इस निर्णय को चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानव सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

भास्कर विश्वकर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में समाज के लिए सकारात्मक योगदान देना चाहिए। उनका मानना है कि यदि मृत्यु के बाद भी शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों में उपयोगी साबित हो सके तो यह मानव सेवा का सर्वोच्च रूप है। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सा विज्ञान की बारीकियों को समझने में देहदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे भावी चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त होता है। जिसका लाभ अंततः समाज को मिलता है।

देहदान के प्रति जागरूकता का संदेश

भास्कर विश्वकर्मा का यह कदम समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी के अभाव या सामाजिक भ्रांतियों के कारण देहदान जैसे मानवीय कार्य से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में उनका निर्णय लोगों को प्रेरित करने और इस विषय पर सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक हो सकता है।

कला और समाज सेवा में बनाई पहचान

भास्कर विश्वकर्मा लंबे समय से मूर्तिकला और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी से मूर्तिकला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपनी रचनात्मक प्रतिभा के बल पर प्रदेशभर में पहचान बनाई। सुभसा स्कल्पटर्स फाउंडेशन के माध्यम से वह कला संरक्षण और युवा कलाकारों के मार्गदर्शन का कार्य भी कर रहे हैं। साधारण परिवार से निकलकर अपनी मेहनत और लगन के दम पर पहचान बनाने वाले भास्कर विश्वकर्मा का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश लेकर आया है। कला के क्षेत्र में योगदान देने के बाद अब उन्होंने मानव सेवा के लिए भी एक ऐसी मिसाल पेश की है। जिसकी व्यापक सराहना की जा रही है।

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