उत्तर प्रदेश के ​शिक्षामित्रों को हाईकोर्ट का बड़ा झटका: स्पेशल टीईटी परीक्षा के आवेदन को किया खारिज, 220 से अ​धिक ने दायर की थी याचिका

प्रयागराज|
स्पेशल टीईटी परीक्षा के आवेदन को किया खारिज, 220 से अ​धिक ने दायर की थी याचिका

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और आरटीई एक्ट की धारा 23 के अनुपालन में परिषदीय स्कूलों में पहले से नौकरी कर रहे उन नियमित शिक्षकों के लिए एक 'स्पेशल टीईटी' आयोजित करने का निर्णय लिया था, जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं किया है। इस विशेष परीक्षा का उद्देश्य इन सेवारत नियमित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पात्रता पूरी करने का एक अवसर देना है।

राज्य सरकार के इसी फैसले के खिलाफ वसीम अहमद और 220 अन्य शिक्षामित्रों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि वे भी परिषदीय स्कूलों में वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी इस विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में बैठने और आवेदन करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

​शिक्षामित्र नियमित ​शिक्षक की श्रेणी में नही आते

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और चयन आयोग की तरफ से स्पष्ट किया गया कि स्पेशल टीईटी सिर्फ उन नियमित इन-सर्विस शिक्षकों के लिए है जिनकी सेवा शर्तें अलग हैं। शिक्षामित्र नियमित शिक्षक की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए वे इस परीक्षा में समानता का दावा नहीं कर सकते। इसके अलावा, जुलाई 2026 में हुई सामान्य टीईटी परीक्षा में शामिल होने का विकल्प उनके पास मौजूद था।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को सही माना

हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति सरकारी सेवा में कार्यरत नियमित शिक्षकों से पूरी तरह अलग है। यदि किसी वैध कानूनी उद्देश्य के तहत दो श्रेणियों में अंतर किया गया है, तो संविधान राज्य को उस अंतर को खत्म करने के लिए बाध्य नहीं करता। याचिकाकर्ता सिर्फ इस आधार पर विशेष परीक्षा में शामिल होने का अधिकार नहीं मांग सकते कि वे सामान्य टीईटी में बैठने के योग्य हैं।

सामान्य टीईटी परीक्षाओं पर रहना पड़ेगा निर्भर

उत्तर प्रदेश में करीब 1.43 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अब भी टीईटी उत्तीर्ण नहीं है। शिक्षामित्रों को उम्मीद थी कि इस विशेष परीक्षा के जरिए उन्हें पात्रता हासिल करने और भविष्य में नियमितीकरण की राह आसान करने का मौका मिलेगा। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उनके लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता बंद हो गया है और उन्हें पात्रता के लिए सामान्य टीईटी परीक्षाओं पर ही निर्भर रहना होगा।

नव्य जागरण

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