गाजियाबाद में महिला को मुस्लिम पति के साथ रहने की मिली अनुमति: हाई कोर्ट ने दिया आदेश, अदालत ने कहा- बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा से जीने का अधिकार है

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की एक महिला को उसके पिता की अभिरक्षा से मुक्त करते हुए उसे अपने मुस्लिम पति के साथ रहने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने 26 वर्षीय सोनिका चौहान को रिहा करने का आदेश दिया और उसे अपने पति अकबर खान के साथ रहने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह आदेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। राज्य सरकार ने अदालत के आठ सितंबर 2026 के पहले के आदेश के अनुपालन में 22 सितंबर को सोनिका को अदालत के समक्ष पेश किया था।
अदालत ने सोनिका से बातचीत की जिसमें उसने स्पष्ट रूप से बताया कि वह 26 वर्ष की है और स्नातक है। उसने अपनी इच्छा से अकबर खान के साथ विवाह किया है और उसके साथ रहना चाहती है। सोनिका ने आरोप लगाया कि उसके पिता उसकी शादी से नाखुश हैं और उन्होंने उसे घर में बंद कर रखा था। अकबर खान ने भी सोनिका के इन बयानों का समर्थन किया और उसके साथ रहने की इच्छा जताई। वहीं अदालत से बातचीत के दौरान सोनिका के पिता लक्ष्मण सिंह चौहान ने कहा कि उनकी बेटी को अकबर ने ब्लैकमेल किया है और वह उसके दबाव में है।
मुस्लिम पति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है महिला
हालांकि संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद अदालत ने कहा कि यह स्थापित कानूनी सिद्धांत है कि बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने और अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने का मौलिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि ऐसा चुनाव संबंधित व्यक्ति का निजी अधिकार है और इसे माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों की इच्छा के अनुसार नियंत्रित या निर्देशित नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा कि सोनिका अपने साथी अकबर खान के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को दंपति को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने परिवार के सदस्यों को भी दंपति के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया।










