असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश: लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान, यूके और गुजरात के बाद UCC लागू करने की दिशा में बढ़ा असम

1 घंटा पहले
लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान, यूके और गुजरात के बाद UCC लागू करने की दिशा में बढ़ा असम

असम विधानसभा में सोमवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार की ओर से राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने इस विधेयक को सदन के पटल पर रखा। दो सप्ताह पहले ही राज्य कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दी थी। अब इस पर 27 मई को विधानसभा में विस्तृत चर्चा होगी। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जनजातियों, चाहे वे पहाड़ी हों या मैदानी, को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को भी छूट देने का प्रावधान किया गया है। सरकार के मुताबिक UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना और व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित करना है।

शादी, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप पर फोकस

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार प्रस्तावित UCC चार प्रमुख विषयों को कवर करेगा। इनमें विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों का नियमन शामिल है। बिल में लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे सामाजिक और कानूनी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह कदम राज्य की सामाजिक और कानूनी संरचना में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत चर्चा और सभी समुदायों की राय लेने की मांग की है। वहीं सरकार इसे महिलाओं के अधिकार और सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा सुधार बता रही है।

उत्तराखंड बना था पहला राज्य

देश में सबसे पहले उत्तराखंड ने स्वतंत्र भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया था। वहां फरवरी 2024 में विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और जनवरी 2025 में नियमावली को कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू किया गया। उत्तराखंड में बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान लागू किए गए हैं।

अन्य राज्यों की राजनीति को कर सकता है प्रभावित

एक्सपर्ट्स कहना है कि असम में UCC बिल पेश किया जाना राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा अन्य राज्यों की राजनीति और सामाजिक विमर्श को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल विधानसभा में होने वाली चर्चा और बिल के अंतिम स्वरूप पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।