सिर्फ सोनोग्राफी करने से पॉक्सो केस नहीं बनेगा: हाईकोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ रद्द की एफआईआर, कोर्ट ने बताई कानूनी शर्त

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी नाबालिग गर्भवती की केवल सोनोग्राफी करने के आधार पर चिकित्सक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में एक रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ दर्ज कार्रवाई को निरस्त कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा-19 के तहत सूचना देने का दायित्व तभी बनता है, जब संबंधित व्यक्ति को यौन अपराध की जानकारी हो या उसके होने की आशंका हो। केवल चिकित्सकीय दायित्व निभाते हुए सोनोग्राफी करना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।
डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई रद्द
मामले में राजनांदगांव की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आरती उइके (वास्कले) पर आरोप था कि उन्होंने 15 वर्षीय गर्भवती नाबालिग की सोनोग्राफी करने के बाद पुलिस को सूचना नहीं दी। इसके आधार पर पॉक्सो एक्ट की धारा-21 के तहत पूरक चालान पेश किया गया था। अदालत ने कहा कि केवल अनुमान या आशंका के आधार पर किसी चिकित्सक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसी आधार पर डॉक्टर के विरुद्ध दर्ज कार्रवाई और एफआईआर को रद्द कर दिया गया।
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