पंजाब में ट्रेड डील के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच: शंभू-खनौरी बॉर्डर सील, हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम

अमेरिका-भारत संभावित ट्रेड डील के विरोध में पंजाब के किसानों ने मंगलवार को दिल्ली कूच शुरू कर दिया। किसान सुबह ही पटियाला-अंबाला के बीच स्थित शंभू बॉर्डर और संगरूर-जींद के खनौरी बॉर्डर पर पहुंच गए। किसानों की आवाजाही की सूचना मिलते ही हरियाणा पुलिस ने दोनों सीमाओं पर बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच किसानों ने बॉर्डर पर ही डेरा डाल दिया है और स्थायी मोर्चा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के संयोजक सरवण पंधेर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है। बैरिकेडिंग के साथ बुलडोजर मशीनें भी तैनात की गई हैं, ताकि अस्थायी या स्थायी ढांचा बनाने की किसी भी कोशिश को तत्काल हटाया जा सके। अंबाला पुलिस ने क्षेत्र में धारा 163 लागू करते हुए प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड से 100 मीटर दूर रहने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने लोगों से किसी भी आपात स्थिति में डायल-112 पर संपर्क करने की अपील भी की है।
हरियाणा पुलिस ने डायवर्ट किया रूट
शंभू बॉर्डर बंद होने का असर जालंधर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर भी दिखाई दिया। सीमा बंद होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट कर दिया। इससे लंबी दूरी के यात्रियों और मालवाहक वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी 13 महीने बंद रहा था शंभू बॉर्डर
किसान आंदोलन के दौरान शंभू बॉर्डर इससे पहले भी 13 महीने, यानी करीब 401 दिन तक बंद रहा था। 13 फरवरी 2024 को सील किए गए इस बॉर्डर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद 20 मार्च 2025 को दोबारा खोला गया था। अब किसानों के नए आंदोलन के बीच इसे फिर से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
आंदोलन पर आमने-सामने आए किसान और भाजपा
किसान मजदूर मोर्चा के संयोजक सरवण पंधेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाना चाहते हैं और किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा और केंद्र सरकार किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगा रही है। उन्होंने हिरासत में लिए गए किसानों की रिहाई की भी मांग की। वहीं, पंजाब भाजपा के प्रवक्ता अनिल सरीन ने आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील अभी हुई ही नहीं है और उसकी कोई आधिकारिक जानकारी भी सामने नहीं आई है। ऐसे में विरोध का औचित्य समझ से परे है। उन्होंने कहा कि जिस फैसले पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ, उसके खिलाफ प्रदर्शन करना उचित नहीं कहा जा सकता।
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