ओला इलेक्ट्रिक पर घाटे का दबाव बरकरार: मार्च तिमाही में 500 करोड़ रुपये का नुकसान, रेवेन्यू में भारी गिरावट

2 घंटे पहले
मार्च तिमाही में 500 करोड़ रुपये का नुकसान, रेवेन्यू में भारी गिरावट

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार की प्रमुख कंपनी ओला इलेक्ट्रिक को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भी घाटे का सामना करना पड़ा है। कंपनी ने मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते हुए बताया कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच उसे करीब 500 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। हालांकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 870 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसके मुकाबले इस बार घाटे में कमी दर्ज की गई है। बावजूद इसके, तिमाही आधार पर कंपनी की वित्तीय स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं दिखा और निवेशकों की चिंता बनी हुई है।

कंपनी के आंकड़ों के अनुसार मार्च तिमाही में ऑपरेशंस से होने वाला राजस्व भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले साल जहां इसी अवधि में कंपनी ने 611 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया था। इस बार यह घटकर 265 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यानी सालाना आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 56 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, डिमांड में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का असर कंपनी के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है।

खर्चों में कटौती के बावजूद दबाव कायम

कमजोर आय के बीच कंपनी ने अपने खर्चों में भी बड़ी कटौती की है। मार्च तिमाही में कुल खर्च घटकर 546 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1306 करोड़ रुपये था। कंपनी ने लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। बावजूद इसके घाटे की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी। तिमाही आधार पर देखें तो दिसंबर तिमाही के मुकाबले मार्च तिमाही में घाटा करीब तीन प्रतिशत बढ़ा है।

कंपनी का ऑपरेशंस रेवेन्यू आधे से भी कम

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का ऑपरेशंस रेवेन्यू आधे से भी कम होकर 2253 करोड़ रुपये रह गया। वहीं सालाना नेट लॉस घटकर 1833 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 2276 करोड़ रुपये था। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में नकदी प्रबंधन और निवेश बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पूंजी जुटाने की तैयारी में कंपनी

ओला इलेक्ट्रिक ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने कहा है कि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में टिके रहने और विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए कंपनी को मजबूत निवेश की आवश्यकता होगी।

शेयर में 29 प्रतिशत की गिरावट

इस बीच शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन निवेशकों को निराश कर रहा है। बुधवार को कंपनी का शेयर मामूली गिरावट के साथ 36.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक वर्ष में कंपनी के शेयर में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं छह महीनों में भी शेयर लगातार दबाव में रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए कंपनी को बिक्री, प्रोडक्ट क्वालिटी और सर्विस नेटवर्क में बड़े सुधार करने होंगे।

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