हफ्ते में एक बार खाना बनाना भी दिमाग के लिए फायदेमंद: डिमेंशिया का खतरा हो सकता है कम: छह साल तक 11 हजार लोगों पर हुआ रिसर्च

निवेदिता चंद|28 अप्रैल 2026
डिमेंशिया का खतरा हो सकता है कम: छह साल तक 11 हजार लोगों पर हुआ रिसर्च

दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए अब सिर्फ एक्सरसाइज या पढ़ाई ही नहीं, बल्कि किचन का काम भी अहम माना जा रहा है। टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की एक नई रिसर्च में सामने आया है कि घर पर खाना पकाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। स्टडी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति हफ्ते में सिर्फ एक बार भी खाना बनाता है, तो उसमें डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा कम हो सकता है। यह शोध बीएमजे जर्नल ऑफ एपिडीमीलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में प्रकाशित हुआ है और इसे बुजुर्गों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस रिसर्च में 65 साल या उससे अधिक उम्र के करीब 11 हजार लोगों को शामिल किया गया। इन सभी प्रतिभागियों को छह साल तक फॉलो किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि लोग अपने लिए कितनी बार खाना बनाते हैं और इसका उनके दिमाग पर क्या असर पड़ता है। नतीजों में यह साफ सामने आया कि जो लोग नियमित रूप से खाना बनाते थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा कम था। वहीं जो लोग किचन से दूर रहते थे, उनमें यह जोखिम ज्यादा पाया गया।

क्यों फायदेमंद है खाना बनाना?

विशेषज्ञों के अनुसार, खाना बनाना एक मल्टी-टास्किंग एक्टिविटी है। इसमें कई तरह के मानसिक काम शामिल होते हैं। जैसे बाजार से सामान खरीदना, रेसिपी चुनना, सही मात्रा तय करना और समय के अनुसार खाना तैयार करना। ये सभी काम दिमाग को एक्टिव रखते हैं। इससे ब्रेन की कार्यक्षमता बेहतर होती है। याददाश्त मजबूत होती है। यही कारण है कि कुकिंग को अब “ब्रेन एक्सरसाइज” के रूप में भी देखा जा रहा है। रिसर्च में यह भी बताया गया कि खाना बनाते समय व्यक्ति का ध्यान, सोचने की क्षमता और निर्णय लेने की ताकत एक साथ काम करती है। यह दिमाग को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखता है।

छोटी आदत, बड़ा फायदा

इस स्टडी की खास बात यह है कि इसमें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं बताई गई है। सिर्फ हफ्ते में एक बार खाना बनाना भी फायदेमंद माना गया है। यानी छोटी-सी आदत अपनाकर भी लोग अपने दिमाग को स्वस्थ रख सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों को किचन के छोटे-छोटे कामों में शामिल होना चाहिए। इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और वे ज्यादा सक्रिय महसूस करेंगे।

बर्लिन में खास टूर प्रोग्राम

दुनिया भर में डिमेंशिया से निपटने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। बर्लिन में एक अनोखा प्रोग्राम चलाया जा रहा है। यहां चिड़ियाघर में डिमेंशिया मरीजों के लिए खास टूर आयोजित किए जाते हैं। इन टूर के दौरान मरीजों को जानवरों की आवाजें, दृश्य और गंध महसूस कराई जाती है। इससे उनकी पुरानी यादें जागती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका मरीजों को मानसिक राहत देता है और उनकी याददाश्त को बेहतर बनाने में मदद करता है।

डिमेंशिया से बचाव के नए तरीके

डिमेंशिया एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। खासकर बुजुर्गों में इसका खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव बहुत असरदार साबित हो सकते हैं। खाना बनाना, नई चीजें सीखना, सोशल एक्टिविटी में शामिल होना और नियमित एक्सरसाइज करना दिमाग को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

नव्य जागरण

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