थायरॉइड बदलती लाइफस्टाइल का “साइलेंट डिसऑर्डर”: सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं, पुरुषों और युवाओं के लिए भी बढ़ा खतरा

निवेदिता चंद|1 घंटा पहले
सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं, पुरुषों और युवाओं के लिए भी बढ़ा खतरा

बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थायरॉइड की समस्या तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले इसे महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता था। अब पुरुषों और युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्टस् के अनुसार थायरॉइड एक “साइलेंट डिसऑर्डर” है, जो धीरे-धीरे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों और कार्यप्रणालियों को प्रभावित करता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य थकान, कमजोरी या तनाव जैसे लगते हैं, जिसके कारण लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि थायरॉइड शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण हार्मोन है। जब इसकी कार्यप्रणाली बिगड़ती है तो शरीर के ऊर्जा स्तर, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन पर असर पड़ता है। यदि समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए और उचित इलाज शुरू हो जाए, तो इस बीमारी को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।

अचानक वजन बढ़ना या घटना हो सकता है संकेत

एक्सपर्ट्स के मुताबिक बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक वजन बढ़ना या तेजी से घटना थायरॉइड का प्रमुख संकेत हो सकता है। कई लोग डाइटिंग या एक्सरसाइज के बावजूद वजन नियंत्रित नहीं कर पाते है। वहीं कुछ लोगों का वजन तेजी से कम होने लगता है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म में असंतुलन की ओर इशारा करता है। इसके अलावा हर समय थकान महसूस होना, पर्याप्त नींद लेने के बाद भी कमजोरी बने रहना और शरीर में ऊर्जा की कमी होना भी थायरॉइड के शुरुआती लक्षणों में शामिल है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि थायरॉइड हार्मोन का असर सीधे दिल की धड़कनों पर भी पड़ता है। अगर बिना किसी वजह के दिल तेजी से धड़कने लगे या धड़कन असामान्य रूप से धीमी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग इसे सामान्य तनाव या घबराहट समझ लेते हैं, जबकि यह गंभीर हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य और त्वचा पर भी पड़ता है असर

थायरॉइड की समस्या केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। मरीजों में चिड़चिड़ापन, बार-बार मूड बदलना, घबराहट, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को केवल मानसिक तनाव समझकर इलाज नहीं कराते, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। इसके अलावा बालों का तेजी से झड़ना, भौंहों के बाल पतले होना और त्वचा का रूखी व बेजान हो जाना भी थायरॉइड के प्रमुख संकेत माने जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लंबे समय तक बाल झड़ने और स्किन ड्राई रहने जैसी समस्या बनी रहे, तो तुरंत थायरॉइड की जांच करानी चाहिए।

महिलाओं में बढ़ रही परेशानी

एक्सपर्ट्स के अनुसार महिलाओं में थायरॉइड का असर पीरियड्स और फर्टिलिटी पर भी दिखाई देता है। अनियमित मासिक धर्म, अत्यधिक या कम ब्लीडिंग और गर्भधारण में दिक्कत जैसी समस्याएं थायरॉइड से जुड़ी हो सकती हैं। वहीं पुरुषों में भी हार्मोनल असंतुलन और कमजोरी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार थकान, वजन में बदलाव, मूड स्विंग्स या शरीर के तापमान को सहन करने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत मेडिकल जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही इलाज से थायरॉइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

नव्य जागरण

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