अलकनंदा महिला छात्रावास के खाने में फिर निकला कीड़ा: 120 छात्राओं के लिए बनी थीं 250 कलौजियां; कैटरर हटा, तीन महीने बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के अलकनंदा महिला छात्रावास के खाने में एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। छात्रा की थाली में बैंगन की कलौजी में बरसाती कीड़ा मिलने के बाद भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए। खास बात यह है कि करीब तीन महीने पहले भी छात्राओं ने खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने तब कोई कार्रवाई नहीं की। अब दोबारा शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने वर्तमान कैटरर को हटाने का फैसला किया है। सोमवार से मेस की जिम्मेदारी नए कैटरर को दी जाएगी। सवाल यह है कि तीन महीने पहले शिकायत के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और दोबारा ऐसी स्थिति आने तक इंतजार क्यों किया गया?
छात्रावास की वार्डन के अनुसार, छात्राओं की मांग और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मेनू में हरी एवं स्वास्थ्यवर्धक सब्जियां शामिल की जाती हैं। बरसात के मौसम में सब्जियों की साफ-सफाई और जरूरी निरीक्षण के बाद ही उन्हें भोजन में इस्तेमाल किया जाता है। छात्राओं की लंबे समय से चली आ रही मांग पर मेनू में बैंगन की कलौजी भी शामिल की गई थी। करीब 120 छात्राओं और कर्मचारियों के लिए लगभग 250 कलौजियां तैयार कराई गई थीं। भोजन के दौरान एक छात्रा की थाली में रखी कलौजी की बाहरी सतह पर बरसाती कीड़ा मिला। शिकायत के बाद बाकी तैयार कलौजियों की तत्काल जांच कराई गई। यूनिवर्सिटी के अनुसार, दूसरी किसी कलौजी में कीड़ा नहीं मिला और किसी अन्य छात्रा ने भी ऐसी शिकायत नहीं की।
कैटरर पर गिरी गाज
भोजन में कीड़ा मिलने की शिकायत के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और वर्तमान कैटरर को हटाने का निर्णय किया। सोमवार से नए कैटरर के माध्यम से मेस का संचालन होगा। इसके साथ ही मेस सेवाओं के लिए नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया भी चल रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं को स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
तीन महीने पहले भी छात्राओं ने की थी शिकायत
अलकनंदा महिला छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता को लेकर करीब तीन महीने पहले भी छात्राओं ने शिकायत की थी। उस समय यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद अब फिर छात्रा की थाली में कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आई है। यानी पहली शिकायत के बाद मेस व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं किया गया और करीब तीन महीने बाद फिर खाने को लेकर छात्राओं को शिकायत करनी पड़ी। इस बार प्रशासन ने कैटरर हटाने का फैसला तो किया है, लेकिन इससे पहले की शिकायत पर कार्रवाई न होने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मेस कमेटी की निगरानी पर भी सवाल
छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की निगरानी के लिए मेस कमेटी के अंतर्गत छात्राओं की सक्रिय समिति गठित है। यह समिति नियमित रूप से भोजन, साफ-सफाई और मेस व्यवस्था की निगरानी करती है। इसके बावजूद भोजन में कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आना निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अब प्रशासन ने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और मेस संचालन की निगरानी और कड़ाई से कराने की बात कही है।
प्रशासन बोला- गुणवत्ता से समझौता नहीं
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलते ही जरूरी कदम उठाए गए हैं। कैटरर को हटाने के साथ सोमवार से नई व्यवस्था लागू की जा रही है। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और मेस व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी। हालांकि, एक ही छात्रावास में तीन महीने के भीतर भोजन को लेकर दो बार शिकायत सामने आने से अब मेस व्यवस्था की जवाबदेही और निगरानी दोनों कठघरे में हैं।











