शिक्षा नीति के लिए सभी हितधारक जरूरी: शिक्षकों को तकनीक संग बढ़ना होगा आगे, एआई कभी नहीं बनेगा शिक्षक का विकल्प

बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में हितधारकों की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। भंते सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र ने कहा कि नीति शिक्षा को ज्ञान, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों से जोड़ती है। इसके सफल क्रियान्वयन में सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
मुख्य वक्ता डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. पीसी त्रिवेदी ने कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हितधारक है। उसे निरंतर अध्ययन और चिंतन के साथ खुद को अपडेट रखना होगा। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी है। इसका उपयोग विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नैतिकता और विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता विकसित करने में किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच जरूरी
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, मौलिकता और तार्किक चिंतन विकसित होना चाहिए। उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और सामाजिक जरूरतों से जुड़े अनुसंधान को प्राथमिकता देने की जरूरत है। प्रो. अनंत कीर्ति तिवारी ने शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाने और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
अध्यक्षता करते हुए बुद्ध शिक्षा परिषद के सचिव वीरेंद्र सिंह अहलूवालिया ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार और मानवीय मूल्यों के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने किया। आभार डॉ. पंकज द्विवेदी ने जताया। इस दौरान प्रो. धर्मव्रत तिवारी, डॉ. यज्ञेश नाथ त्रिपाठी, प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।










