कुशीनगर में नूरआलम हत्याकांड का फैसला: युवक को जिंदा जलाने वाले को उम्रकैद, दो आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

जिले के चर्चित नूरआलम उर्फ नूरसलाम हत्याकांड में चार साल बाद अदालत ने मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-1) सत्यपाल सिंह प्रेमी की अदालत ने सरफुद्दीन को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद के साथ 1.05 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर पांच महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में कलामुद्दीन और समसुद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। सजा के बाद सरफुद्दीन को कस्टडी में लेकर जिला कारागार देवरिया भेज दिया गया।
एडीजीसी कृष्ण कुमार पांडेय के मुताबिक, वारदात 27-28 अक्टूबर 2022 की रात हुई थी। कसया क्षेत्र में जिगना और शिवपुर के बीच जोगीवोट बाबा स्थान के पास धान के खेत में शाम करीब सात बजे सरफुद्दीन और उसके साथी नूरआलम को टहलाने के बहाने घर से बुलाकर ले गए थे। देर रात तक उसके वापस नहीं लौटने और मोबाइल बंद मिलने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। अगले दिन खेत में पुआल के ढेर पर नूरआलम का जला हुआ शव मिला। पहचान मिटाने के लिए चेहरा और शरीर पूरी तरह जला दिया गया था।
हाथ के पंजे और कमीज के टुकड़े से हुई पहचान
शव इतनी बुरी तरह जला था कि केवल दाहिने हाथ का पंजा और कलाई के पास कमीज का कुछ हिस्सा बचा था। इन्हीं निशानों के आधार पर पिता लियाकत ने बेटे की पहचान की थी। इसके बाद उन्होंने कसया थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस की विवेचना में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश सामने आई।
दुबई के विवाद की रंजिश में हत्या का आरोप
मुकदमे के अनुसार, नूरआलम का बड़ा भाई सलामुद्दीन दुबई में काम करता था। वहीं उसकी सरफुद्दीन से किसी बात को लेकर कहासुनी और विवाद हुआ था। इसके बाद सरफुद्दीन भारत लौट आया और सलामुद्दीन के परिवार से रंजिश रखने लगा। आरोप था कि इसी विवाद का बदला लेने के लिए उसने नूरआलम की हत्या की और पहचान छिपाने तथा साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जला दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सरफुद्दीन को दोषी माना, जबकि कलामुद्दीन और समसुद्दीन को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया।











