पदोन्नति परीक्षा में 115 अभ्यर्थी डिबार: हाईकोर्ट ने मांगा 176 अभ्यर्थियों का परिणाम, वेबसाइट पर सिर्फ व्यक्तिगत परिणाम उपलब्ध

लखनऊ|13 अगस्त 2026
हाईकोर्ट ने मांगा 176 अभ्यर्थियों का परिणाम, वेबसाइट पर सिर्फ व्यक्तिगत परिणाम उपलब्ध

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस विभाग की पदोन्नति परीक्षा में कथित नकल और अनियमितताओं के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति के लिए पांच अक्टूबर 2025 को हुई विभागीय परीक्षा में शामिल सभी 176 अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम तलब किया है। इसके साथ ही चयनित अभ्यर्थियों का सिटिंग प्लान भी पेश करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए बड़े स्तर पर नकल और अन्य गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने यह आदेश कांस्टेबल-ड्राइवर शिव बाबू मिश्रा और छह अन्य की याचिका पर दिया। याचिका में प्रैक्टिकल और टेक्निकल एफिशिएंसी टेस्ट के लिए अभ्यर्थियों के चयन समेत परीक्षा परिणाम के आधार पर की गई सभी परिणामी कार्रवाइयों को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक कोर्ट में मौजूद थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि वेबसाइट पर सभी अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम उपलब्ध नहीं है। अभ्यर्थी केवल अपना व्यक्तिगत परिणाम देख सकता है। इस पर कोर्ट ने सभी 176 अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम तलब कर लिया।

जांच में दो मोबाइल से बढ़कर 115 अभ्यर्थियों तक पहुंचा मामला

पिछली सुनवाई में बोर्ड ने कोर्ट को बताया था कि परीक्षा के दौरान केवल दो अभ्यर्थी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पकड़े गए थे। हालांकि, कोर्ट के निर्देश पर कराई गई जांच में मामला इससे कहीं व्यापक सामने आया। 22 जुलाई को अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक ने कोर्ट को बताया था कि 115 अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल और अन्य अनियमितताओं में शामिल पाया गया। इसके बाद इन अभ्यर्थियों को डिबार कर दिया गया।

आठ ब्लॉक की फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश

कोर्ट ने परीक्षा के सभी आठ ब्लॉक की वीडियो फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। 10 अगस्त को संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। अब कोर्ट परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग और उपलब्ध तस्वीरों का परीक्षण करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच मामले के उचित निस्तारण के लिए की जाएगी। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है।

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