लखनऊ में उज्बेकिस्तान की लोला कायूमोवा गिरफ्तार: छह राज्यों में चलाती थी सेक्स रैकेट, एक साल से पुलिस को दे रही थी चकमा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खुफिया एजेंसी आईबी और सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने छह राज्यों में हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने वाली उज्बेकिस्तान की मुख्य आरोपी लोला कायूमोवा को गिरफ्तार कर लिया है। लोला पिछले एक साल से पुलिस को चकमा दे रही थी और उसके खिलाफ उज्बेकिस्तान में भी लुकआउट नोटिस जारी था।
7 अगस्त को तुर्कमेनिस्तान की एक महिला इलाज के लिए लखनऊ के अहिमामऊ स्थित 'मिनर्वा क्लिनिक' पहुंची थी। नए नियमों के तहत विदेशी नागरिक के इलाज की जानकारी फॉरेनर रजिस्ट्रेशन ऑफिस को देनी जरूरी थी। इस महिला के मेडिकल वीजा दस्तावेजों के साथ लोला ने रेफरेंस के तौर पर अपना फर्जी भारतीय आधार कार्ड लगाया था। आधार कार्ड देखते ही क्लिनिक स्टाफ ने तुरंत फॉरेनर रजिस्ट्रेशन ऑफिस को अलर्ट किया, जिसके बाद संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर लोला को दबोच लिया।
भारत में ठहरने के लिए फर्जी शादी का दावा
पूछताछ में सामने आया कि लोला का वीजा और पासपोर्ट बहुत पहले समाप्त हो चुका था। उसने भारत में अवैध रूप से ठहरने के लिए जनक प्रताप सिंह नाम के व्यक्ति से फर्जी शादी का दावा कर आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज बनवा लिए थे।
उन्चास की उम्र उन्नतीस साल की दिखने के लिए कराया था सर्जरी
DCP साउथ मोहम्मद मुस्ताक के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश के अलावा देश के छह अन्य राज्यों में भी लड़कियों की तस्करी कर देह व्यापार का सिंडिकेट चला रही थी। वह नेपाल के रास्ते लड़कियों को भारत लाती थी। पहले पुलिस जांच में दावा किया गया था कि 49 वर्षीय लोला ने खुद को 29 साल का युवा दिखाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे, होंठ और प्राइवेट पार्ट सहित 7 बार प्लास्टिक सर्जरी कराई थी। साथ ही गिरोह की अन्य लड़कियों को 'रशियन लुक' देने के लिए भी सर्जरी की बात सामने आई थी।
डॉक्टर ने प्राइवेट पार्ट की सर्जरी को किया खारिज
इस मामले में आरोपी मिनर्वा हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने केवल लोला की नाक की सर्जरी (सेप्टो राइनोप्लास्टी) और लेजर से टैटू हटाने का काम किया था क्योंकि उसे सांस लेने में दिक्कत थी। चेहरा पूरी तरह बदलने या प्राइवेट पार्ट ऑपरेट करने के आरोप वैज्ञानिक रूप से असंभव और मनगढ़ंत हैं।
2025 से फरार चल रही थी लोला
जून 2025 में लखनऊ के ओमेक्स अपार्टमेंट में पड़े छापे में दो उज्बेकिस्तानी लड़कियों की गिरफ्तारी के बाद से ही लोला फरार चल रही थी। फिलहाल पुलिस फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करा रही है और गिरोह के स्थानीय मददगारों की तलाश जारी है।











