सिध्दार्थनगर में पीएचसी के सामने खुला फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर: छापे से पहले ही फरार हुआ संचालक, मशीन समेत दो सौ मरीजों की पर्चियां बरामद

खुनियांव ब्लॉक के बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने लंबे समय से संचालित बताए जा रहे गैरपंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी कर उसे सील कर दिया। पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के नेतृत्व में पहुंची टीम को देखते ही सेंटर का संचालक सामने का शटर बंद कर पीछे के रास्ते से फरार हो गया। टीम ने अंदर जांच की तो सेंटर लावारिस मिला। मौके से अल्ट्रासाउंड मशीन, लैपटॉप, प्रिंटर, बिल रजिस्टर, करीब 200 मरीजों की पर्चियां और तीन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बरामद हुईं। सेंटर संचालक कोई वैध पंजीकरण, लाइसेंस या पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत जरूरी अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका।
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जांच में सेंटर के कई वर्षों से संचालित होने की बात सामने आई है। सेंटर का संचालन बढ़या पीएचसी के ठीक सामने किया जा रहा था। ऐसे में बिना पंजीकरण इतने लंबे समय तक गतिविधियां चलने से स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों ने बरामद मशीन और अभिलेखों का विवरण तैयार कर सेंटर को सील कर दिया है। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
छापे की भनक लगते ही पीछे के रास्ते से निकला
कार्रवाई पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के नेतृत्व में की गई। टीम में एसीएमओ डॉ. आरजी सिंह, सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीएन यादव, एनएमएस पन्नालाल, कनिष्ठ सहायक मिथिलेश यादव, शिवम चौबे और माधवानंद शुक्ल समेत स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। टीम के पहुंचने की जानकारी मिलते ही संचालक ने सामने का शटर बंद किया और पीछे के दरवाजे से निकल गया। अधिकारियों ने अंदर पहुंचकर उपकरण और अभिलेख कब्जे में लिए।
एफआईआर पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
सेंटर सील किए जाने के बावजूद समाचार लिखे जाने तक संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। यह भी जांच की जा रही है कि सेंटर इतने लंबे समय तक किस तरह संचालित होता रहा और इसके संचालन में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं थी। जिले में अन्य निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों और पैथोलॉजी संस्थानों की जांच भी तेज होने की संभावना है। सीएमओ संजय दोहरे ने बताया कि नोडल अधिकारी से जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत नहीं पाया गया तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।










