सिद्धार्थनगर में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत: प्रसव के लिए पहुंची थी महिला, बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल

खेसराहा क्षेत्र के बेलोहा स्थित नवजीवन अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच तेज कर दी है। अस्पताल के बिना पंजीकरण संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। टीम महिला की मौत के कारण के साथ अस्पताल के संचालन, चिकित्सकीय व्यवस्था, ऑपरेशन और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी।
रिंका के पति मनीष अग्रहरि के अनुसार, 14 अगस्त को प्रसव के लिए वह पत्नी को सीएचसी खेसराहा लेकर गए थे। वहां से उन्हें बेलोहा स्थित नवजीवन अस्पताल जाने की सलाह दी गई। दोपहर करीब दो बजे रिंका को लेकर वह अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि जांच के बाद पहले सामान्य प्रसव होने का भरोसा दिया गया। इसके बाद महिला के पेट पर दबाव बनाया गया। इससे उसे तेज दर्द हुआ। कुछ देर बाद उसका ऑपरेशन कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद रिंका की हालत बिगड़ गई और मुंह से झाग निकलने लगा। अस्पताल की ओर से दो यूनिट ब्लड मंगवाकर चढ़ाया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
डॉक्टरों की योग्यता और अस्पताल के बोर्ड भी जांच के दायरे में
नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के अनुसार, नवजीवन अस्पताल का कोई पंजीकरण नहीं है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि ऑपरेशन किसने किया, उसकी चिकित्सकीय योग्यता और वैध पंजीकरण क्या था, ऑपरेशन का निर्णय किसने लिया और उस समय अस्पताल में कौन-कौन मौजूद था? अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और डॉक्टरों के नाम के बोर्ड लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। टीम यह भी जांच करेगी कि बोर्ड पर दर्ज डॉक्टर वास्तव में अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे या नहीं और रिंका के इलाज और ऑपरेशन में उनकी क्या भूमिका थी। अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की सुविधा किस अनुमति के तहत संचालित हो रही थी, इसकी भी पड़ताल होगी।
सीसीटीवी और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे
जांच टीम अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, मरीज की पर्ची, भर्ती रजिस्टर, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज, दवाओं और ब्लड चढ़ाने के रिकॉर्ड की जांच करेगी। इन दस्तावेजों से रिंका के अस्पताल पहुंचने के समय, ऑपरेशन के दौरान मौजूद लोगों, हालत बिगड़ने के बाद दिए गए उपचार और गोरखपुर भेजने के निर्णय की जानकारी जुटाई जाएगी।
रास्ते में हुई मौत
परिजनों के मुताबिक, हालत गंभीर होने पर अस्पताल ने रिंका को तत्काल गोरखपुर ले जाने की सलाह दी। अस्पताल संचालक की गाड़ी से उसे गोरखपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन रात करीब 10 से 11 बजे के बीच शव लेकर बेलोहा स्थित नवजीवन अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। सूचना पर पुलिस पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। हंगामे के दौरान अस्पताल में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग वहां से चले गए।
अवैध अस्पताल और लापरवाही की होगी जांच
सीएमओ डॉ. संजय दोहरे ने जांच टीम में एसडीएम बांसी, सीओ बांसी, डिप्टी सीएमओ, नोडल अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक को शामिल किया है। जांच रिंका की मौत के कारण के साथ अस्पताल के बिना पंजीकरण संचालन और वहां चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े सभी पहलुओं पर केंद्रित रहेगी। रिंका की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण जांच और मेडिकल साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट होगा।










