आज खुले रहेंगे सभी सरकारी बैंक: कल से तीन दिन तक रहेगी हड़ताल, 7.5 लाख कर्मचारी होंगे शामिल

गोरखपुर|
कल से तीन दिन तक रहेगी हड़ताल, 7.5 लाख कर्मचारी होंगे शामिल

बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम लंबित है तो उसे रविवार को ही निपटाया जा सकता है। रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के बावजूद आज सरकारी बैंक खुले हैं। इसके बाद सोमवार से बुधवार तक बैंक कर्मचारी तीन दिन की हड़ताल पर रहेंगे। बैंक यूनियनें सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन साप्ताहिक अवकाश की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं। करीब 7.5 लाख बैंक कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने का दावा किया गया है।

रविवार को बैंक खुलने का मौका करीब 10 साल बाद आया है। इससे पहले 2016 में नोटबंदी के दौरान 14 नवंबर को रविवार के दिन बैंक खोले गए थे। उस समय पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने, जमा करने और नकदी निकालने के लिए बैंकों में लंबी कतारें लगी थीं। भीड़ को संभालने के लिए रविवार को भी बैंकिंग सेवाएं जारी रखने का फैसला किया गया था।

हड़ताल के दौरान एटीएम से नकद निकासी पर शुल्क नहीं

हड़ताल के दौरान एसबीआई और पीएनबी समेत सरकारी बैंकों के एटीएम से मासिक मुफ्त सीमा पार होने के बाद भी नकद निकासी पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। आरबीआई के नियमों के तहत अपने बैंक के एटीएम से महीने में पांच बार मुफ्त नकद निकासी की सुविधा है। दूसरे बैंक के एटीएम से मेट्रो शहरों में तीन और अन्य शहरों में पांच मुफ्त लेनदेन की सीमा है। इसके बाद प्रत्येक नकद निकासी पर 23 रुपये प्लस जीएसटी शुल्क लगता है।

यूनियनों ने बातचीत की अपील ठुकराई

वित्तीय सेवा विभाग, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक प्रबंधन की हड़ताल टालने की अपील यूनियनों ने स्वीकार नहीं की है। एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीईएफ और आईएनबीओसी समेत सात प्रमुख यूनियनें आंदोलन में शामिल होंगी। यूनियनों का कहना है कि पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की निश्चित तारीख तय होने तक विरोध जारी रहेगा।

पीएलआई के नियमों का किया विरोध

पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह के साथ प्रदर्शनकारी यूनियनें प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई के नियमों का भी विरोध कर रही हैं। सरकार ने स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए नया प्रोत्साहन नियम लागू किया है। इसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को 365 दिन की बेसिक सैलरी के बराबर इंसेंटिव या बोनस मिलने की व्यवस्था बताई गई है। यूनियनें इस प्रावधान पर भी आपत्ति जता रही हैं।

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