पार्क हॉस्पिटल के डॉक्टरों से करोड़ों की धोखाधड़ी: कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर, रिकॉर्ड बदलकर वास्तविक मुनाफा छिपाया

गोरखपुर|1 घंटा पहले
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर, रिकॉर्ड बदलकर वास्तविक मुनाफा छिपाया

जिले के पार्क हॉस्पिटल में दो डॉक्टरों के साथ करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया है। दवा कंपनी मेडरेव हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों पर अस्पताल के रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर डेटा में गड़बड़ी करने का आरोप है।आरोपियों ने वास्तविक लाभ को छिपाकर डॉक्टरों के हिस्से की बड़ी राशि हड़पने का प्रयास किया। इस मामले में लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।अब कोर्ट के आदेश पर कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी गई तहरीर में पार्क हॉस्पिटल के सह-स्वामी डॉ. ओंकार नाथ राय ने बताया कि उनका और डॉ. धर्मेन्द्र कुमार राय का मेडरेव हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के साथ लिखित समझौता था। समझौते के तहत अस्पताल परिसर में कंपनी द्वारा ओपीडी और आईपीडी फार्मेसी का संचालन किया जा रहा था। अनुबंध के अनुसार फार्मेसी से होने वाले लाभ का 75 प्रतिशत हिस्सा डॉक्टरों को और 25 प्रतिशत हिस्सा कंपनी को दिया जाना तय था। दोनों पक्षों के बीच यह व्यावसायिक व्यवस्था कई वर्षों से संचालित हो रही थी।

लाभ के आंकड़ों में भारी अंतर

डॉ. ओंकार नाथ राय के अनुसार कंपनी के रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर डेटा की जांच के दौरान मार्च 2019 से अक्टूबर 2024 तक की बिक्री और लाभ से जुड़े आंकड़ों में भारी अंतर सामने आया। उनका आरोप है कि अस्पताल को उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट और सॉफ्टवेयर रिपोर्ट के बीच लाभ संबंधी आंकड़े मेल नहीं खाते हैं। इससे यह आशंका उत्पन्न हुई कि वास्तविक लाभ को कम दिखाकर हिस्सेदारी की राशि में गड़बड़ी की गई है। शिकायत में कहा गया है कि उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में कुल 1.65 करोड़ रुपये से अधिक के लाभ का अंतर पाया गया। आरोप है कि इस राशि में डॉक्टरों का 75 प्रतिशत हिस्सा, करीब 1.24 करोड़ रुपये, जानबूझकर डेटा में कूटरचना कर हड़प लिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि वर्ष 2015 से दोनों पक्षों के बीच व्यावसायिक संबंध रहे हैं। संभावना है कि पूर्व में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं की गई हों।

पुलिस ने शुरु की जांच

डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत पहले थाना कैंट और एसएसपी से की थी। लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद कैंट थाने की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उपलब्ध दस्तावेजों, समझौते और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।

नव्य जागरण

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